नई दिल्ली
भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे गंभीर प्रशासनिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के 2025-26 सत्र के शुरू न हो पाने से चिंतित भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री सहित कई सीनियर और विदेशी खिलाड़ियों ने विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA से हस्तक्षेप की अपील की है। खिलाड़ियों का कहना है कि मौजूदा हालात भारतीय फुटबॉल को ‘स्थायी ठहराव’ की ओर धकेल रहे हैं।
संयुक्त वीडियो बयान में राष्ट्रीय टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन ने कहा कि जनवरी का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन खिलाड़ी अब तक प्रतिस्पर्धी फुटबॉल से दूर हैं। गुरप्रीत ने कहा कि आमतौर पर इस समय वे मैदान पर होते और प्रशंसकों के सामने खेलते, लेकिन अब डर और अनिश्चितता के माहौल में अपनी आवाज उठाने को मजबूर हैं।
खिलाड़ियों ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ फिलहाल अपनी जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अपील किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल के अस्तित्व को बचाने की मजबूरी में की जा रही है। बयान में कहा गया कि देश मानवीय, खेल और आर्थिक संकट से गुजर रहा है और जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ तो नुकसान अपूरणीय हो सकता है।
सुनील छेत्री ने अपने संदेश में कहा कि खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ, क्लब मालिक और प्रशंसक—सभी स्पष्टता, सुरक्षा और एक ठोस भविष्य के हकदार हैं। उन्होंने जोर दिया कि फुटबॉलरों की यह गुहार टकराव के लिए नहीं, बल्कि खेल को बचाने की आखिरी कोशिश है।
गौरतलब है कि इंडियन सुपर लीग का 2025-26 सत्र जुलाई में उस समय रोक दिया गया था, जब लीग के पूर्व आयोजक फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) और एआईएफएफ के बीच ‘मास्टर राइट्स एग्रीमेंट’ के नवीनीकरण को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। यह समझौता 8 दिसंबर को समाप्त हो गया, जिसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की निगरानी में आईएसएल के व्यावसायिक अधिकारों के लिए निविदा जारी की गई, लेकिन कोई भी बोलीदाता सामने नहीं आया। इस बीच, लीग के 14 में से 13 क्लबों ने एआईएफएफ को सूचित किया है कि यदि उनसे भागीदारी शुल्क न लिया जाए और राष्ट्रीय संस्था आयोजन व संचालन की वित्तीय जिम्मेदारी ले, तो वे विलंबित सत्र में भाग लेने को तैयार हैं।
कुल मिलाकर, खिलाड़ियों की यह अपील भारतीय फुटबॉल के भविष्य को लेकर गहरी चिंता को दर्शाती है। अब निगाहें फीफा पर टिकी हैं कि वह इस संकट में क्या भूमिका निभाता है।






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