सिडनी,
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के साथ ही अपने करियर के एक संवेदनशील पहलू पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि पूरे करियर के दौरान उन्हें नस्लीय रूढ़ियों (racial stereotyping) का सामना करना पड़ा और हालिया एशेज सीरीज़ के दौरान लगी चोट के बाद जिस तरह की आलोचना हुई, उसने उन्हें गहराई से आहत किया।
39 वर्षीय ख्वाजा ने एशेज सीरीज़ के सिडनी टेस्ट के बाद संन्यास लेने की पुष्टि की है। उन्होंने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में करीब 50 मिनट की भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने अनुभव साझा किए। ईएसपीएनक्रिकइंफो के मुताबिक, ख्वाजा ने बताया कि एशेज सीरीज़ की शुरुआत में पीठ में ऐंठन (back spasms) के कारण वह दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में ओपनिंग नहीं कर पाए थे।
ख्वाजा ने कहा कि पर्थ टेस्ट से पहले उन्होंने तीन दिन गोल्फ खेली थी, जिस पर मीडिया और कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने उन पर तीखा हमला किया।
उन्होंने कहा,“मैं हमेशा से खुद को थोड़ा अलग महसूस करता आया हूं। मैं एक रंगीन क्रिकेटर हूं। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम हमारे लिए गर्व की बात है, लेकिन मुझे कई बार अलग तरह से ट्रीट किया गया। मेरी चोट मेरे नियंत्रण में नहीं थी, फिर भी जिस तरह मीडिया और पूर्व खिलाड़ियों ने मुझ पर हमला किया, वह सिर्फ मेरे प्रदर्शन तक सीमित नहीं था।”
उन्होंने आगे कहा कि आलोचना उनके व्यक्तिगत चरित्र और प्रतिबद्धता पर की गई।“मुझ पर कहा गया कि मैं टीम के लिए प्रतिबद्ध नहीं हूं, मैं सिर्फ अपने बारे में सोचता हूं, मैं गोल्फ खेलने चला गया, मैं आलसी हूं, मैंने ठीक से ट्रेनिंग नहीं की। ये वही नस्लीय रूढ़ियां हैं, जिनके साथ मैं पूरी ज़िंदगी बड़ा हुआ हूं। मुझे लगा था कि मीडिया और पुराने खिलाड़ी इससे आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन शायद हम अब भी पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाए हैं।”
उस्मान ख्वाजा ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात से निराशा हुई कि दूसरे खिलाड़ियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता।
“मैं ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूं, जहां खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेले, चोटिल हुए और किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ लोग तो मैच से एक रात पहले शराब पीते हैं और चोटिल हो जाते हैं—तब भी सब कहते हैं कि वे बस ‘ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स’ हैं। लेकिन जब मैं चोटिल हुआ, तो मेरी साख और मेरे व्यक्तित्व पर सवाल उठाए गए।”
गौरतलब है कि उस्मान ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर हैं। उन्होंने अपने करियर में अब तक 87 टेस्ट मैचों में 6,206 रन, 16 शतक और 28 अर्धशतक बनाए हैं। उनका औसत 43.39 का रहा है।
ख्वाजा का यह बयान न सिर्फ क्रिकेट, बल्कि खेल जगत में भेदभाव और समान व्यवहार के बड़े सवाल को भी सामने लाता है।