आवाज द वाॅयस / नई दिल्ली
पांच राज्यों में चल रही मतगणना के बीच असम की बिन्नाकांडी विधानसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। शुरुआती रुझानों में इत्र कारोबारी और AIUDF प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल आगे चल रहे हैं। मतगणना केंद्रों से जैसे जैसे आंकड़े सामने आ रहे हैं, इस सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
मौलाना बदरुद्दीन अजमल सिर्फ एक नेता नहीं हैं। वे एक बड़े कारोबारी भी हैं। उनका अजमल ग्रुप इत्र, तेल और कपड़ों के कारोबार से जुड़ा है। इसके साथ ही वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कई अस्पताल, अनाथालय और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में योगदान दिया है। खासकर महिलाओं के लिए विज्ञान कॉलेज जैसी पहल ने उन्हें एक अलग पहचान दी है।
अजमल ने इस्लामिक शिक्षा भी हासिल की है। उन्होंने दारुल उलूम देवबंद से पढ़ाई की है। वे लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक मंचों से जुड़े रहे हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की स्थापना की, जिसे बाद में AIUDF के नाम से जाना गया।
बिन्नाकांडी सीट इस बार पहली बार सुर्खियों में है। यह विधानसभा क्षेत्र 2023 में परिसीमन के बाद बनाया गया था। पहले यह क्षेत्र जामुनामुख सीट का हिस्सा था। अब यह काजीरंगा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह इलाका असम के होजाई जिले में पड़ता है और ग्रामीण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा खेती और छोटे व्यापार पर निर्भर है। लगभग 2.69 लाख मतदाता इस सीट पर दर्ज हैं। मतदान में लोगों की भागीदारी काफी ज्यादा रही। इस बार लगभग 87.75 प्रतिशत मतदान हुआ। इससे साफ है कि लोगों में चुनाव को लेकर रुचि बनी हुई है।
इस क्षेत्र की सामाजिक बनावट भी अलग है। यहां बंगाली भाषी मतदाता बड़ी संख्या में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का असर भी चुनावी नतीजों पर साफ दिखाई देता है। यही कारण है कि यह सीट हर बार राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनी रहती है।
बिन्नाकांडी में कई बुनियादी समस्याएं भी हैं। यहां बाढ़ की समस्या अक्सर लोगों को परेशान करती है। सड़कें कई जगहों पर खराब हालत में हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी एक बड़ी चिंता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। यही मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बनते रहे हैं।
इस बार मुकाबले में AIUDF के मौलाना बदरुद्दीन अजमल के साथ AGP के साहबुद्दीन मजूमदार और असम जातीय परिषद के रेजाउल करीम चौधरी भी मैदान में हैं। मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है।
शुरुआती रुझान भले ही अजमल के पक्ष में हों, लेकिन अंतिम नतीजों पर सभी की नजर टिकी है। ग्रामीण इलाकों में वोटिंग पैटर्न अक्सर आखिरी समय तक बदलते रहते हैं।अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या बदरुद्दीन अजमल अपनी बढ़त को जीत में बदल पाएंगे या फिर कोई नया समीकरण सामने आएगा। मतगणना के आगे बढ़ने के साथ तस्वीर और साफ होती जाएगी।