Uttarakhand CM Dhami inaugurates Fifth Border Hill District Children’s Science Festival in Bageshwar
बागेश्वर (उत्तराखंड)
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पांचवें सीमावर्ती पहाड़ी ज़िला बाल विज्ञान महोत्सव का उद्घाटन किया। X पर एक पोस्ट में, धामी ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान विज्ञान के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। उन्होंने युवा और बाल इनोवेटर्स के साथ बातचीत भी की। सीएम धामी ने कहा, "बागेश्वर में पांचवें सीमावर्ती पहाड़ी ज़िला बाल विज्ञान महोत्सव-2026 के दौरान, विज्ञान के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया और युवा व बाल इनोवेटर्स के साथ बातचीत की गई। इस मौके पर विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अहम घोषणाएं भी की गईं।"
उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव में चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ ज़िलों के 240 चुने हुए युवा वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सीमावर्ती ज़िला विज्ञान महोत्सव और उससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए ₹1 करोड़ की घोषणा की। उन्होंने राज्य की STEM प्रयोगशालाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने और हर विकास खंड में एक 'लैब ऑन व्हील्स' स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की। इसके अलावा, उन्होंने उत्तराखंड के सभी ज़िलों में विज्ञान और इनोवेशन सेंटर स्थापित करने की घोषणा की।
सीएम धामी ने आगे कहा, "राज्य के सभी ज़िलों में विज्ञान और इनोवेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) प्रयोगशालाओं को AI से जोड़ा जाएगा और सभी ब्लॉकों में 'लैब ऑन व्हील्स' चलाई जाएगी। साथ ही, सीमावर्ती ज़िला विज्ञान महोत्सव और उससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए एक करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे, महिला विज्ञान और विकास सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, और स्कूलों को रोबोटिक्स और ड्रोन शिक्षा से जोड़ने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।"
सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रही है और साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने के लिए उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
मुख्यमंत्री ने फेस्टिवल में हिस्सा ले रहे युवा वैज्ञानिकों से बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए। उन्होंने उन्हें मन लगाकर पढ़ने, नए आइडिया पर काम करने और सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा वैज्ञानिक भविष्य में देश के प्रमुख वैज्ञानिक, इंजीनियर और रिसर्चर बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक विकसित भारत के विज़न को साकार करने में युवा पीढ़ी अहम भूमिका निभाएगी। धामी ने कहा कि दूर-दराज़ और पहाड़ी इलाकों में आयोजित होने वाले साइंस फेस्टिवल छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देते हैं और साथ ही उनमें वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और इनोवेशन की भावना को बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने छात्रों से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लेने और विज्ञान व रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने का आग्रह किया, ताकि वे राज्य और देश के विकास में योगदान दे सकें। स्कूल शिक्षा में आधुनिक तकनीक को शामिल करने पर ज़ोर देते हुए, मुख्यमंत्री ने शिक्षा प्रणाली को रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक से जोड़ने की बात कही। उन्होंने महिलाओं के विकास और विज्ञान पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य में इनोवेशन, सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और स्मार्ट खेती को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देहरादून में एक साइंस सिटी विकसित की जा रही है, जबकि चंपावत में एक साइंस सेंटर बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 'हाउस ऑफ़ हिमालयाज़' ब्रांड के ज़रिए स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा दे रही है। खेती, बागवानी, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में स्वरोज़गार के अवसर बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।
फेस्टिवल के दौरान, विज्ञान के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए शिक्षक कविता हरकोटिया, दीप चंद जोशी, हरिमोहन ऐथानी और ख्याली दत्त को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।