उत्तर प्रदेश 64,000 करोड़ रुपये की जमा राशि के साथ शीर्ष पर: रिपोर्ट

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 30-04-2026
Uttar Pradesh tops with deposits worth Rs 64,000 crore: Report
Uttar Pradesh tops with deposits worth Rs 64,000 crore: Report

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने वाली 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना' (पीएमजेडीवाई) के तहत खुले खातों और जमा राशि के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। राज्य में इस साल अप्रैल तक 10.32 करोड़ जन-धन खातों में करीब 64,000 करोड़ रुपये जमा हैं, जो कुल जमा का लगभग 18 प्रतिशत है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

बैंक प्रतिनिधि (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट) नेटवर्क का संचालन करने वाली बीएलएस ई-सर्विसेज लिमिटेड की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में जन-धन खातों में कुल जमा राशि अप्रैल 2026 तक बढ़कर लगभग 3.07 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
 
आंकड़ों के मुताबिक, आठ अप्रैल 2026 तक जन-धन खातों की कुल संख्या बढ़कर 58.06 करोड़ हो गई जो अप्रैल 2025 में 55.28 करोड़ और अप्रैल 2024 में 52.01 करोड़ थी।
 
जमा राशि में भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी देखी गई है। अप्रैल 2024 के 2.34 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर यह अप्रैल 2026 में 3.07 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।
 
'प्रधानमंत्री जन धन योजना' भारत सरकार का एक प्रमुख वित्तीय समावेश कार्यक्रम है। इसके तहत शून्य राशि यानी बिना किसी रकम के बैंक खाते खोले जाते हैं। इसका उद्देश्य हर परिवार को बैंकिंग सेवा से जोड़ना है।
 
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में खोले गए कुल 10.32 करोड़ जन-धन खातों में करीब 64,000 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कुल जमा का लगभग 18 प्रतिशत है। उसके बाद बिहार और पश्चिम बंगाल का स्थान है, जहां क्रमश: 30,000-30,000 करोड़ रुपये जमा हैं।
 
अन्य बड़े राज्यों में राजस्थान (24,000 करोड़ रुपये), महाराष्ट्र (22,000 करोड़ रुपये) और मध्य प्रदेश (19,000 करोड़ रुपये) शामिल हैं। कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और गुजरात जैसे राज्यों में भी खातों की सक्रियता में तेजी दर्ज की गई है।
 
रिपोर्ट के अनुसार, जमा में यह बढ़ोतरी बैंक प्रतिनिधि नेटवर्क में तेजी से विस्तार का नतीजा है। बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट सेंटर बैंक का ऐसा सेवा केंद्र होता है जहां बैंक की शाखा न होते हुए भी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके कारण बैंकिंग सेवाओं को गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
 
इन केंद्रों के माध्यम से लोग अपने इलाके में ही जमा, निकासी, पैसे भेजना और अन्य बैंकिंग सेवाएं ले पा रहे हैं, जिससे बैंक शाखाओं पर निर्भरता कम हुई है।