आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले ‘शहीद दिवस’ का आयोजन मंगलवार को एक अभूतपूर्व दौर में पहुंच गया, जब तीन प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक खेमे मध्य कोलकाता में महज ढाई किलोमीटर के दायरे में समानांतर कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं।
इसके साथ ही यह वार्षिक स्मृति दिवस विरासत, संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की प्रतिस्पर्धा में बदल गया है।
कार्यक्रमों के शुरू होने से कुछ घंटे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बिड़ला तारामंडल के पास अपने गुट के कार्यक्रम स्थल पर रात भर रहीं। दरअसल, ममता के गुट ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम को बाधित करने के प्रयास में "भाजपा समर्थित बदमाशों" ने मंच, बैनर और ध्वनि प्रणाली में तोड़फोड़ की।
अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी और डोला सेन समेत वरिष्ठ नेताओं के साथ ममता बनर्जी पूरी रात कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहीं, जबकि पार्टी कार्यकर्ता मंगलवार सुबह तक मंच की सुरक्षा में तैनात रहे।
ममता बनर्जी ने मध्यरात्रि के करीब कार्यक्रम स्थल पर समर्थकों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 1993 की पुलिस गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिवारों और कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम में शामिल होने से रोका जा रहा है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया, "हमारे कार्यकर्ताओं को बैठक में आने से रोका जा रहा है। पुलिस द्वारा शहीदों के परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा है। हमारे मंच पर तोड़फोड़ की गई है, बैनर फाड़ दिए गए हैं और बिजली तथा माइक की लाइन काट दी गई हैं। अदालत के आदेश पर बाहर आए एक अपराधी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के करीब 60-65 समर्थित गुंडों ने इस हमले को अंजाम दिया है।’’
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।