The Opposition should not attempt to undermine the country; the Prime Minister's global stature is paramount: Sitharaman
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
विपक्ष पर देश को नीचा दिखाने का प्रयत्न करने का आरोप लगाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के सभी संकेतक मजबूत स्थिति में हैं और दुनिया के सभी देशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साख सबसे ऊपर है।
सीतारमण ने लोकसभा में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही।
समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य धर्मेंद्र यादव ने पूरक प्रश्न पूछते हुए कहा कि केंद्र में राजग सरकार बनने से पहले भाजपा के नेता कहते थे कि डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य गिरने से प्रधानमंत्री की साख भी गिरती है तो क्या आज जब भारतीय मुद्रा अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले इतने निचले स्तर पर है तो क्या वित्त मंत्री आज भी इस बात पर कायम हैं कि प्रधानमंत्री की साख गिर रही है।
सीतारमण ने जवाब में कहा कि एक हालिया वैश्विक सर्वेक्षण में दुनिया के सभी प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों की लोकप्रियता में भारत के प्रधानमंत्री की साख सबसे ऊपर है। इस पर विपक्षी सदस्यों ने टोकाटोकी की।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘भारत के प्रधानमंत्री की साख सबसे ऊपर है। इनके लिए यह बात पचा पाना मुश्किल है। इसलिए बार-बार प्रश्नचिह्न उठाया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि राजकोषीय स्थिति, राजकोषीय घांटे के पांच साल के प्रबंधन पर दुनियाभर में हो रही प्रशंसा को देखें तो भारत की अर्थव्यवस्था एकदम मजबूत है।
वित्त मंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस नीत सरकार के समय अर्थव्यव्था के सभी आधारभूत तत्व कमजोर थे और देश पांच सबसे कजोर अर्थव्यवस्था में गिना जाने लगा था, तब भाजपा ने चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज जब अर्थव्यवस्था के सभी आधारभूत ठीकठाक हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को भी देखें तो अर्थव्यवस्था सही स्थिति में है। जब अन्य देशों की अर्थव्यवस्था ऊपर-नीचे जा रही है, तो ऐसे में भी भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है।’’
सीतारमण ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘ये केवल एक विषय को पकड़कर पूरे व्यापक आर्थिक मुद्दे को, देशवासियों की मेहतन, किसानों की मेहतन को कमजोर दिखा रहे हैं। विपक्ष को देश के साथ खड़े रहने चाहिए। देश को नीचा दिखाने का प्रयत्न करना ठीक नहीं है।’’
उनसे पहले वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जहां तक विदेशी मुद्रा के सापेक्ष रुपये के मूल्य की बात है तो यह बाजार आधारित होता है और बाजार कई घरेलू एवं बाहरी कारकों पर निर्भर करता है।