कुरान का चमत्कार मानवीय बुद्धि और चिंतन के लिए शाश्वत चुनौती : प्रो. मुस्तफा शरीफ

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 30-10-2026
The miracle of the Quran: An eternal challenge to human intellect and reflection – Prof. Mustafa Sharif
The miracle of the Quran: An eternal challenge to human intellect and reflection – Prof. Mustafa Sharif

 

हैदराबाद।

कुरान का चमत्कार केवल अतीत की कोई अकादमिक बहस नहीं है, बल्कि यह हर दौर के इंसान को चिंतन, शोध और सच्चाई की तलाश के लिए प्रेरित करने वाला जीवंत विषय है। कुरान को समझने का प्रयास भाषा और साहित्य की गहराइयों में उतरने, बुद्धि और विवेक को जागृत करने तथा मानव जीवन के उद्देश्य पर विचार करने का नाम है।

ये विचार उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के पूर्व डीन, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स प्रोफेसर मुहम्मद मुस्तफा शरीफ ने व्यक्त किए। वह मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (मानू) के अरबी विभाग की ओर से आयोजित एक विशेष व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान का विषय ‘कुरान करीम के चमत्कार के विभिन्न वैज्ञानिक और अकादमिक आयाम’ था।

प्रोफेसर मुस्तफा शरीफ ने अपने व्याख्यान में कुरान के चमत्कार, उसके बौद्धिक और वैचारिक पहलुओं तथा समकालीन दौर में कुरानी ज्ञान की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस विषय के विभिन्न पहलुओं को सामने रखते हुए कुरान के अध्ययन में भाषा, साहित्य, चिंतन और शोध के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर इश्तियाक अहमद, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज, लिंग्विस्टिक्स एंड इंडोलॉजी की डीन प्रोफेसर गुलफिशां हबीब और अरबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सईद बिन मखाशन सहित कई प्रमुख शिक्षाविद और साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मानू के रजिस्ट्रार प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालयों की वास्तविक अकादमिक ताकत केवल उनकी इमारतों या पाठ्यक्रमों में नहीं होती, बल्कि उन शैक्षणिक बैठकों में भी होती है, जहां ज्ञान, अनुभव और शोध की परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचती है।

उन्होंने कहा कि प्रोफेसर मुस्तफा शरीफ के अकादमिक और शोध अनुभवों से लाभ उठाने का यह आयोजन शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर है। उनके मुताबिक, अरबी विभाग में इस तरह के विशेष व्याख्यान आयोजित करना इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय भाषा और साहित्य की पढ़ाई के साथ शोध की रुचि, आलोचनात्मक समझ और अकादमिक संवाद को भी महत्व देता है।

अरबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सईद बिन मखाशन ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि कुरान के चमत्कार का विषय हर दौर में अकादमिक शोध और बौद्धिक विवेक के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है।

उन्होंने कहा कि कुरान अपनी अभिव्यक्ति शैली, भाषा और साहित्य, अर्थ एवं भाव, संरचना तथा मार्गदर्शन की व्यापक व्यवस्था के माध्यम से इंसान को लगातार चिंतन की प्रेरणा देता है।

डॉ. मखाशन ने यह भी कहा कि कुरान के चमत्कार का अध्ययन महज धार्मिक विषय तक सीमित नहीं है। इसका संबंध अरबी भाषा और साहित्य, कुरान के विभिन्न विज्ञानों, तफसीर, बलागात और मानवीय चिंतन के कई क्षेत्रों से है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. आसिफ लईक नदवी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर प्रोफेसर अजीज बानो, स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स की पूर्व डीन, प्रोफेसर एमेरिटस सैयद अलीम अशरफ जायसी, प्रोफेसर पठान रहीम खान, प्रोफेसर इफ्तिखार आलम, कार्यक्रम संचालक डॉ. जावेद नदीम नदवी, डॉ. समीना कौसर, डॉ. तल्हा फरहान, डॉ. शाकिर रजा और डॉ. शम्सुद्दीन सहित विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।