The 'Hum Do Hamare Do' nature of the economy is discouraging growth of private investment: Congress
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि महंगाई के हिसाब से समायोजन के बाद जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दरों के जो आंकड़े सामने रखे जा रहे हैं, वे भ्रामक हैं।
पार्टी ने जोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्था का ‘हम दो हमारे दो’ वाला स्वरूप निजी निवेश की वृद्धि को हतोत्साहित ही करेगा, जहां ‘मार्केट लीडर’ नवाचार के बजाय सरकारी संरक्षण से उभरते हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि भय (फीयर), छल (डिसेप्शन) और डराने-धमकाने (इंटिमिडेशन) यानी एफडीआई का माहौल भी उद्यम जगत के ऊपर मंडरा रहा है।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘प्राइस डिफ्लेटर (मूल्य अपव्यय) स्वयं ही बहुत कम हैं और इसी कारण ये वृद्धि दरें कृत्रिम रूप से बढ़ी-चढ़ी दिखाई देती हैं।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘कम ‘प्राइस डिफ्लेटर’ मोदी सरकार को भले ही खुशी दें, लेकिन वे वास्तव में कम उपभोक्ता मांग का नतीजा हैं - जो पिरामिड के बिल्कुल ऊपरी हिस्से को छोड़कर आय स्तरों के ठहराव से पैदा हुई है।’’
रमेश ने इस बात को रेखांकित किया कि कॉरपोरेट भारत नकदी से भरा पड़ा है और मुनाफे रिकॉर्ड स्तर पर हैं तथा कर्ज रिकॉर्ड निचले स्तर पर। उन्होंने सवाल किया, लेकिन आने वाले बजट को जिस सवाल का बेबाकी से जवाब देना होगा, वह सीधा है - कंपनियां क्षमता विस्तार में निवेश करने के बजाय वित्तीय बाजारों में संपत्ति प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान क्यों दे रही हैं?
उन्होंने दावा किया, ‘‘निवेश माहौल को साफ तौर पर एक ‘बूस्टर डोज’ की जरूरत है। कर कटौतियों की पूरी शृंखला मांग को प्रोत्साहित करने में स्पष्ट रूप से विफल रही है।’’
रमेश ने कहा कि दुर्भाग्य से इसका जवाब सिर्फ राजकोषीय फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मोदी सरकार के राजनीतिक-आर्थिक मॉडल की ओर इशारा करता है।