आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने पर सोमवार को सहमति जताई जिसमें देशभर में आवारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने के लिए उसे दिए गए निर्देश को चुनौती दी गई है।
एनएचएआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दलील दी कि न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने एनएचएआई को आश्रय स्थल बनाने का निर्देश दिया था, जबकि यह जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और प्रशासन की है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एनएचएआई को देशभर में आवारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने का निर्देश दिया गया है और प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक इसमें करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा पक्ष यह है कि यह काम स्थानीय जिला प्रशासन को करना चाहिए। हम इसे पूरे देश के स्तर पर नहीं कर सकते।’’