सपा नेता आलम बदी आजमी का निधन, 90 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 23-07-2026
SP leader Alam Badi Azmi passes away; breathed his last at the age of 90
SP leader Alam Badi Azmi passes away; breathed his last at the age of 90

 

लखनऊ/आजमगढ़

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलम बदी आजमी का बुधवार देर रात 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और लखनऊ के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर सामने आते ही आजमगढ़ समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनके निधन को आजमगढ़ की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा से लोकप्रिय विधायक और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता जनाब आलम बदी साहब के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को इस गहन दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

आलम बदी आजमी का जन्म वर्ष 1936 में आजमगढ़ जिले के बिलरियागंज क्षेत्र के बिंदवल-जयराजपुर गांव में हुआ था। उनका परिवार आजमगढ़ शहर के माताबगंज स्थित आवास में रहता था। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और शुरुआती दौर में गोरखपुर में कुछ समय तक नौकरी भी की। हालांकि, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा जीवन समाज सेवा तथा राजनीति को समर्पित कर दिया।

आलम बदी आजमी ने वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर निजामाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने इसी सीट का पांच बार प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र के एक मजबूत जननेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। जनता के बीच उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि वे लगातार लोगों के विश्वास पर खरे उतरते रहे। उनका राजनीतिक जीवन सत्ता की बजाय जनसेवा के लिए अधिक जाना गया।

उनके राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित प्रसंग वर्ष 2012 में सामने आया, जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री पद की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि मंत्री बनने की बजाय वे अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर सीधे उनकी सेवा करना अधिक पसंद करेंगे। उस समय उनका यह फैसला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना और इसे राजनीति में सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना गया।

आलम बदी आजमी की पहचान केवल एक सफल विधायक के रूप में नहीं थी, बल्कि उनकी सादगी उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी। वे हमेशा साधारण कुर्ता-पायजामा और चप्पल पहनते थे। उनके पास कोई महंगा स्मार्टफोन नहीं, बल्कि एक साधारण कीपैड मोबाइल फोन था। सुनने में परेशानी होने के कारण वे छोटा-सा हियरिंग एड इस्तेमाल करते थे। विधायक रहने के बावजूद उन्होंने कभी तामझाम, सुरक्षा घेरे या सरकारी शानो-शौकत को अपने जीवन का हिस्सा नहीं बनाया।

उनके घर आने वाले लोगों का स्वागत बेहद सादगी से किया जाता था। मेहमानों को छोटे कपों में काली चाय परोसी जाती थी और उनके बेटे तथा पोते स्वयं मेहमानों की सेवा करते थे। घर में कोई घरेलू कर्मचारी नहीं रखा गया था। वे अक्सर अपने घर के बाहर टीन शेड के नीचे बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते थे। कई बार वे पैदल ही इलाके में निकल पड़ते और रास्ते में मिलने वाले लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानने का प्रयास करते थे। यही कारण था कि वे केवल एक विधायक नहीं, बल्कि जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाते थे।

अपने पूरे राजनीतिक जीवन में आलम बदी आजमी ने ईमानदारी, पारदर्शिता और स्वच्छ छवि बनाए रखी। उन पर कभी व्यक्तिगत लाभ या सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप नहीं लगे। वे राजनीति को सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का रास्ता मानते थे। विकास कार्यों, पारदर्शी कार्यशैली और जनता से लगातार जुड़े रहने की उनकी सोच ने उन्हें राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठाकर सम्मान दिलाया। यही वजह थी कि विरोधी दलों के नेता भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली की खुलकर सराहना करते थे।

आलम बदी आजमी के निधन के बाद आजमगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिसने सिद्धांतों, सादगी और जनसेवा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।