सिक्किम HC ने NH-10 ऑड-ईवन नीति पर सरकार को 3 हफ्ते दिए

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 24-09-2026
Sikkim HC gives govt 3 weeks to revisit odd-even policy on NH-10
Sikkim HC gives govt 3 weeks to revisit odd-even policy on NH-10

 

गंगटोक (सिक्किम)

सिक्किम हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को NH-10 के उस हिस्से पर अपनी ऑड-ईवन वाहन नीति पर फिर से विचार करने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया है, जो मेफेयर जंक्शन, रानीपूल और ज़ीरो पॉइंट जंक्शन, गंगटोक के बीच है। चीफ जस्टिस ए. मोहम्मद मुस्ताक और जस्टिस भास्कर राज प्रधान की डिवीज़न बेंच ने 22 सितंबर को महेश राय और अन्य द्वारा सिक्किम राज्य और अन्य के खिलाफ दायर एक PIL (जनहित याचिका) की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, एडिशनल एडवोकेट जनरल ज़ंगपो शेरपा ने बेंच को बताया कि राज्य सरकार "मेफेयर जंक्शन, रानीपूल से ज़ीरो पॉइंट जंक्शन, गंगटोक तक NH-10 के हिस्से पर लागू ऑड-ईवन प्रतिबंधों की अपनी नीति पर फिर से विचार कर रही है।"
 
इस बात पर ध्यान देते हुए, बेंच ने कहा, "ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए, हम इस मामले की सुनवाई तीन हफ़्ते के लिए टालते हैं।" मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। यह ताज़ा घटनाक्रम तब हुआ है जब हाई कोर्ट ने पहले राज्य सरकार के उस फ़ैसले के व्यापक असर की जांच की थी, जिसके तहत ऑड-ईवन वाहन प्रतिबंधों को गंगटोक से आगे सिक्किम के अन्य हिस्सों तक बढ़ाया गया था। यह ताज़ा घटनाक्रम मई के बाद से राज्य की ऑड-ईवन नीति में हुए कई बदलावों के बाद आया है, जब सरकार ने ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच प्रतिबंध लागू किए थे।
 
इसके बाद, राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा के बाद, सरकार ने 31 मई से गंगटोक शहर को छोड़कर सभी ज़िलों में निजी वाहनों की आवाजाही पर ऑड-ईवन प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटा लिया। यह प्रतिबंध तब हटाया गया जब हाई कोर्ट में सरकार के प्रतिबंधों को चुनौती दी गई थी। उस समय जारी गृह विभाग की एक अधिसूचना के अनुसार, यह फ़ैसला एक समीक्षा के बाद लिया गया था जिसमें पाया गया कि राज्य में मौजूदा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीज़ल का पर्याप्त बफ़र स्टॉक तैयार कर लिया गया है। गंगटोक शहर के भीतर मौजूदा ऑड-ईवन ट्रैफ़िक नियम लागू रहे।
 
ईंधन बचाने के व्यापक उपायों में मुख्यमंत्री के वाहन काफ़िले में 50 प्रतिशत की कटौती, सरकारी दफ़्तरों के लिए पाँच दिन का कार्य-सप्ताह, रोस्टर के आधार पर आधे सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क-फ़्रॉम-होम की व्यवस्था और सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में 30 प्रतिशत की कटौती भी शामिल थी। इस बीच, हाई कोर्ट में दायर PIL ने पाबंदियों के आम जनता पर असर को न्यायिक जांच के दायरे में ला दिया। पिछली सुनवाई के दौरान, बेंच ने नागरिकों को हो रही दिक्कतों की जानकारी मांगी और ज़िला अधिकारियों को जनता की शिकायतों को इकट्ठा करके रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था और आने-जाने के वैकल्पिक तरीकों के बारे में भी जानकारी मांगी।
 
याचिकाकर्ताओं ने पूरे राज्य में ऑड-ईवन सिस्टम को लागू करने को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि इन पाबंदियों से गाड़ियों की आवाजाही पर असर पड़ा और जनता को परेशानी हुई। सिक्किम में यह मुद्दा खास तौर पर अहम हो गया, क्योंकि वहां रोज़ाना आने-जाने और ज़रूरी सेवाओं तक पहुँचने के लिए सड़क संपर्क बहुत ज़रूरी है।
 
सुनवाई के शुरुआती दौर में कोर्ट ने कहा था: "अभी हमारे सामने सवाल यह है कि ऑड-ईवन नियम लागू होने की वजह से जनता को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।" 22 सितंबर के आदेश से अब यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार इस पॉलिसी पर फिर से विचार कर रही है, कम से कम मेफेयर जंक्शन और ज़ीरो पॉइंट जंक्शन के बीच NH-10 कॉरिडोर के मामले में।