नयी दिल्ली
भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए रोहित जैन को नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। यह नियुक्ति केंद्रीय बैंक की शीर्ष प्रबंधन संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
सरकारी आदेश के अनुसार, रोहित जैन वर्तमान में आरबीआई में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। अब वे डिप्टी गवर्नर के रूप में कार्यभार संभालेंगे और वे टी. रबी शंकर का स्थान लेंगे, जिनका विस्तारित कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो गया। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है और वे 3 मई या उसके बाद पदभार ग्रहण कर सकते हैं।
आरबीआई अधिनियम, 1934 के अनुसार, केंद्रीय बैंक में कुल चार डिप्टी गवर्नर होते हैं। इनमें विभिन्न विशेषज्ञ क्षेत्रों से अधिकारी शामिल किए जाते हैं ताकि मौद्रिक नीति, बैंकिंग पर्यवेक्षण और वित्तीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संतुलित निर्णय लिए जा सकें। परंपरा के अनुसार, इनमें से दो अधिकारी आरबीआई के आंतरिक ढांचे से, एक वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र से और एक अर्थशास्त्री मौद्रिक नीति विभाग का नेतृत्व करता है।
वर्तमान में आरबीआई में अन्य तीन डिप्टी गवर्नर के रूप में स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता और एस. सी. मुर्मू कार्यरत हैं। इन अधिकारियों के साथ मिलकर नया नेतृत्व देश की मौद्रिक और वित्तीय नीतियों को आगे बढ़ाएगा।
रोहित जैन का अनुभव आरबीआई के विभिन्न विभागों में रहा है, जिससे उन्हें बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय स्थिरता की गहरी समझ है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से केंद्रीय बैंक की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया और मजबूत होगी, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं।
टी. रबी शंकर को पहली बार सितंबर 2021 में तीन साल के कार्यकाल के लिए डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया था। बाद में उनके कार्यकाल को 2024 में और फिर 2025 में एक-एक वर्ष का विस्तार दिया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सुधार और वित्तीय स्थिरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
रोहित जैन की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं, मुद्रास्फीति और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही है। ऐसे में आरबीआई की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह देश की मौद्रिक नीति और बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए डिप्टी गवर्नर के सामने सबसे बड़ी चुनौती मूल्य स्थिरता बनाए रखना, बैंकिंग सेक्टर में सुधार जारी रखना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच भारतीय वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।
इस नियुक्ति के साथ आरबीआई के शीर्ष नेतृत्व में एक नया संतुलन देखने को मिलेगा, जो आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।