वर्ष 2025-26 में वाहनों की खुदरा बिक्री 13.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2.96 करोड़ इकाई तक पहुंची:फाडा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-04-2026
Retail vehicle sales to grow 13.3% to a record 29.6 million units in 2025-26: FADA
Retail vehicle sales to grow 13.3% to a record 29.6 million units in 2025-26: FADA

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
देश में सभी श्रेणियों में वाहनों की खुदरा बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में 13.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2,96,71,064 इकाई पर पहुंच गई। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
 
वाहन उद्योग के निकाय के अनुसार इससे गत वित्त वर्ष 2024-25 में कुल खुदरा बिक्री 2,61,87,255 इकाई थी। वर्ष की शुरुआत सुस्त रहने के बावजूद माल एवं सेवा कर में बदलाव (जीएसटी 2.0) के लागू होने से बाजार में तेजी आई।
 
फाडा के बयान के अनुसार, यात्री वाहन की खुदरा बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में 13 प्रतिशत बढ़कर 47,05,056 इकाई हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 41,63,927 इकाई थी।
 
संगठन ने कहा कि वह आशावादी रुख अपनाए है, लेकिन पश्चिम एशिया युद्ध के भारत में वाहनों की मांग पर भविष्य में पड़ने वाले संभावित प्रभाव के प्रति सतर्क भी है।
 
इसी तरह दोपहिया वाहनों की बिक्री भी पिछले साल 13.4 प्रतिशत बढ़कर 2,14,20,386 इकाई हो गई जबकि 2024-25 में यह 1,88,89,595 इकाई थी।
 
वित्त वर्ष 2025-26 में तिपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 13,63,412 इकाई रही जो वित्त वर्ष 2024-25 की 12,20,834 इकाई के मुकाबले 11.68 प्रतिशत अधिक है।
 
फाडा के अनुसार वाणिज्यिक वाहनों की खुदरा बिक्री भी 11.74 प्रतिशत बढ़कर 10,60,906 इकाई हो गई जो वित्त वर्ष 2024-25 में 9,49,406 इकाई थी।
 
उद्योग के प्रदर्शन पर फाडा के अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर ने कहा, ‘‘2025-26 भारतीय मोटर वाहनों के खुदरा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें 13.3 प्रतिशत सालाना वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 2,96,71,064 इकाइयों की बिक्री दर्ज की गई। छह में से पांच वाहन श्रेणियों में बिक्री के नए रिकॉर्ड बने।’’
 
उन्होंने कहा कि यह केवल एक संख्या नहीं है बल्कि यह दर्शाता है कि उद्योग तीन करोड़ इकाइयों के स्तर के करीब पहुंच रहा है जो दो वर्ष पहले तक काफी दूर की बात लगती थी।
 
विग्नेश्वर ने कहा कि वित्त वर्ष की धीमी शुरुआत के बाद सितंबर में जीएसटी 2.0 लागू होने के साथ स्थिति में बदलाव आया। दरों के पुनर्संतुलन से दोपहिया, छोटी कारों, तिपहिया और कुछ वाणिज्यिक श्रेणियों पर प्रभावी कर बोझ कम हुआ, जिससे उस समय वहनीयता में सुधार हुआ जब उपभोक्ता खरीद के लिए तैयार थे।