आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का जिक्र करते हुए शुक्रवार को कहा कि बदलती भू-राजनीति के इस दौर में महासागर एक बार फिर दुनिया के शक्ति संतुलन के केंद्र में आ गए हैं और भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास एवं क्षमता के साथ नेतृत्व प्रदान करे।
सिंह ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम ‘‘बेहद असामान्य’’ हैं और क्षेत्र की स्थिति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में जो हो रहा है, वह बेहद असामान्य है। इस समय इस पर कोई ठोस टिप्पणी करना कठिन है कि पश्चिम एशिया में परिस्थितियां आगे किस दिशा में जाएंगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी के पूरे क्षेत्र को देखें तो यह दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जब इस क्षेत्र में अशांति या व्यवधान होता है तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज हम केवल ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति शृंखला में व्यवधान देख रहे हैं। इन अनिश्चितताओं का सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।’’