आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के वर्गीकरण संबंधी नियमों पर फिर से विचार करने की वकालत की।
उन्होंने कहा कि इन नियमों को वैश्विक स्तर पर एक समान व्यवस्था के अनुरूप बनाने के बजाय देश की कारोबारी परंपराओं और नकदी प्रवाह के तौर-तरीकों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
नागेश्वरन ने कहा कि नीतिगत स्तर पर वित्त मंत्रालय इन मानदंडों की समीक्षा की वकालत करता रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले एमएसएमई की कार्यशील पूंजी की जरूरतें और नकदी प्रवाह की स्थिति अलग-अलग होती हैं।
मौजूदा व्यवस्था के तहत, बकाया भुगतान की अवधि के आधार पर कर्ज को विशेष उल्लेख खातों (एसएमए) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसकी श्रेणियां 30 दिन, 60 दिन और 90 दिन के बकाया भुगतान के अनुरूप हैं। आम तौर पर, यदि ब्याज या मूलधन का भुगतान 90 दिन से अधिक समय तक बकाया रहता है तो खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) यानी फंसा कर्ज घोषित कर दिया जाता है।
सीईए ने कहा कि एसएमए श्रेणी में आने से ही कर्ज लेने वालों पर गंभीर असर पड़ सकता है। कारोबारियों को औपचारिक रूप से एनपीए घोषित किए जाने से पहले ही मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।