आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि यह पहल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में वास्तविक निवासियों की मदद के लिए की गई है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ये प्रमाणपत्र उन लोगों के लिए लाभकारी होंगे, जो एसआईआर के दौरान मांगे जा रहे पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह कानून के अनुसार की जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने आवेदकों के कर्नाटक में जन्म के आधार पर स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने का फैसला किया है। (एसआईआर की प्रक्रिया में) ज्यादातर लोगों से 2002 की मतदाता सूची का विवरण मांगा गया है। करीब 50 से 60 प्रतिशत लोगों के पास ऐसे रिकॉर्ड हो सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों के पास ये रिकॉर्ड नहीं भी हो सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र मददगार साबित होगा।’’
परमेश्वर ने कहा कि तहसीलदार पहले भी जाति प्रमाणपत्र जारी करते रहे हैं और सरकार की इस पहल की आलोचना पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देना होगा। यदि आवेदक यह प्रमाण देते हैं कि वे 10 वर्षों से कर्नाटक में रह रहे हैं, तो उन्हें प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। क्या हम अपनी बेटियों की शादी बांग्लादेशियों से कर सकते हैं? नहीं। हम न तो केंद्र सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं और न ही किसी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हम पूरी तरह कानून के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।’’