‘नोटा’ अवांछित उम्मीदवारों को बढ़ावा देता है: मोहन भागवत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-01-2026
'NOTA' promotes undesirable candidates: Mohan Bhagwat
'NOTA' promotes undesirable candidates: Mohan Bhagwat

 

नागपुर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया और मतदान के बाद पत्रकारों से बातचीत में ‘नोटा’ विकल्प पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नोटा का चुनाव करना दरअसल परोक्ष रूप से अवांछित उम्मीदवारों को बढ़ावा देने जैसा है और इसलिए योग्य उम्मीदवार को ही वोट देना जरूरी है।

भागवत सुबह लगभग साढ़े सात बजे नागपुर के महल इलाके में स्थित मतदान केंद्र पहुंचे और पहले मतदाताओं में शामिल होकर अपने मत का प्रयोग किया। मतदान के बाद उन्होंने कहा, “चुनाव लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा है और सभी नागरिकों की यह जिम्मेदारी है कि वे मतदान में हिस्सा लें। जनहित और समाज के कल्याण को ध्यान में रखते हुए मतदान करना चाहिए।”

उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि चुनाव के दौरान अपने मत का सही उपयोग करें और केवल योग्य उम्मीदवार को ही वोट दें। भागवत ने नोटा विकल्प पर भी टिप्पणी करते हुए कहा, “नोटा का मतलब है कि आप सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार कर रहे हैं। लेकिन ऐसा करने से अनजाने में हम एक ऐसे उम्मीदवार को बढ़ावा दे सकते हैं जिसे कोई नहीं चाहता। इसलिए किसी को वोट न देने से बेहतर है कि किसी योग्य उम्मीदवार को वोट दिया जाए।”

आरएसएस प्रमुख ने नोटा को मतदाताओं की असहमति व्यक्त करने का एक विकल्प माना, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को वोट न देना परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उनका यह भी कहना था कि मतदान करना हर नागरिक की पहली जिम्मेदारी है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

नागपुर में पिछले नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कुल 151 सीटों में से 108 सीटें जीतकर भारी बहुमत बनाया था। वहीं, कांग्रेस ने 28 सीटें, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 10 सीटें, शिवसेना (तब अविभाजित) ने दो और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अविभाजित) ने एक सीट जीती थी।

भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मतदान हो रहा है और मतदाताओं को चुनाव में सक्रिय भागीदारी के लिए जागरूक किया जा रहा है। उनके विचारों में यह संदेश निहित है कि लोकतंत्र में जिम्मेदार और विचारशील मतदान से ही सही नेतृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है।इस प्रकार मोहन भागवत ने मतदान का महत्व और नोटा विकल्प के दुष्परिणामों पर जोर देते हुए नागपुर चुनाव में जागरूक मतदाताओं के लिए मार्गदर्शन पेश किया।