गुजरात यूनिवर्सिटी में ‘मोदी तत्व’ पर नया पाठ्यक्रम

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 02-05-2026
New Course on ‘Modi Tattva’ at Gujarat University
New Course on ‘Modi Tattva’ at Gujarat University

 

वडोदरा

गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू) ने समाजशास्त्र के पाठ्यक्रम में एक नया और चर्चित मॉड्यूल शामिल किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व, जिसे ‘मोदी तत्व’ कहा गया है, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इतिहास का अध्ययन किया जाएगा। इस नए कोर्स का उद्देश्य इन दोनों के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है।

विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि “सोशियोलॉजी ऑफ पैट्रियटिज्म” (देशभक्ति का समाजशास्त्र) नामक यह पाठ्यक्रम दो वर्षीय एमए कार्यक्रम का हिस्सा होगा। इस कोर्स के तहत छात्रों को ‘मोदी तत्व’ की अवधारणा को विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों से समझने का अवसर मिलेगा।

डॉ. सिंह के अनुसार, किसी भी राजनीतिक और नेतृत्व अध्ययन में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘करिश्माई नेतृत्व’ की अवधारणा को समझने के लिए महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेताओं के उदाहरण दिए जाते हैं। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को भी एक अध्ययन विषय के रूप में शामिल किया गया है, ताकि इसे वैज्ञानिक दृष्टि से परखा जा सके।

इस मॉड्यूल में ‘मोदी तत्व’ को मीडिया और डिजिटल राष्ट्रवाद, नागरिकता और असहमति, तथा वैश्वीकरण और पहचान की राजनीति जैसे विषयों के साथ जोड़कर पढ़ाया जाएगा। पाठ्यक्रम का उद्देश्य यह समझना है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता क्यों लगातार बनी हुई है, उनकी स्वीकार्यता इतनी व्यापक कैसे है, और उनके लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के पीछे कौन-से सामाजिक कारक काम कर रहे हैं।

डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियां—जैसे नोटबंदी, डिजिटल क्रांति, फास्टैग और जल शक्ति मंत्रालय की पहल—यह दर्शाती हैं कि वे जनता की अपेक्षाओं को किस तरह समझते हैं। यही कारण हो सकता है कि उन्हें व्यापक जनसमर्थन प्राप्त होता है।

इस नए पाठ्यक्रम में कुल चार पेपर शामिल होंगे, जिनमें प्रत्येक के लिए 15 घंटे का शिक्षण निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, इसमें राष्ट्रवाद, राष्ट्र-राज्य और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे विषयों को वैश्विक दृष्टिकोण के साथ पढ़ाया जाएगा।

पाठ्यक्रम में सामाजिक सुधारकों के योगदान को भी शामिल किया गया है। इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के कार्यों का अध्ययन किया जाएगा, जिन्होंने समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने में भूमिका निभाई।

डॉ. सिंह के अनुसार, इस कोर्स की प्रेरणा उस समय मिली जब विभाग के छात्र नीति आयोग की परियोजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर रहे थे। वहां उन्होंने देखा कि कुछ समूह, जो इन योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय थे, उनका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से था। इससे यह महसूस हुआ कि इस संगठन और इसके सामाजिक प्रभाव का भी समाजशास्त्रीय अध्ययन आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया पाठ्यक्रम छात्रों को समकालीन भारत की राजनीति, समाज और नेतृत्व को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा। साथ ही, यह अकादमिक जगत में वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक प्रवृत्तियों पर गंभीर विमर्श को भी प्रोत्साहित करेगा।