Netanyahu trying to undermine elections through an ugly delegitimisation campaign against Arab Israelis: Yair Golan
यरूशलम [इजरायल]
इजरायल की डेमोक्रेटिक पार्टी के चेयरमैन यायर गोलान ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू को "करारी हार" का सामना करना पड़ा है। अब वे "जनता की इच्छा के खिलाफ एक भद्दे अभियान" के जरिए चुनाव नतीजों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर अरब इजरायली नागरिकों के संदर्भ में। यायर गोलान ने 'X' पर लिखा, "नेतन्याहू को लोकतांत्रिक तरीके से करारी हार मिली है। जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया है, लेकिन वे मतदाताओं के फैसले को मानने से इनकार कर रहे हैं। अब वे जनता की इच्छा के खिलाफ - और विशेष रूप से अरब आबादी के खिलाफ - एक भद्दे अभियान के जरिए चुनाव नतीजों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।"
हाल ही में संपन्न हुए नेसेट (इजरायली संसद) चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप की संभावनाओं की जांच 'शिन बेट' (इजरायली खुफिया एजेंसी) कर रही है। इस बीच, गोलान ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि नेतन्याहू "प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली करें"। गोलान ने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता को लेकर किसी भी तरह के गंभीर संदेह की "पूरी तरह से जांच" होनी चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि "कतर की सबसे गंभीर दखलंदाजी" नेतन्याहू के अपने कार्यालय में हुई थी, जिसे उनके सबसे करीबी सलाहकार ने अंजाम दिया था। गोलान ने 'X' पर लिखा, "चुनावों की निष्पक्षता को लेकर किसी भी गंभीर संदेह की पूरी जांच होनी चाहिए। और एक पल के लिए भी यह नहीं भूलना चाहिए कि नेतन्याहू के कार्यालय में ही उनके सबसे करीबी सलाहकार ने विश्वासघात किया और कतर की सबसे गंभीर दखलंदाजी को अंजाम दिया। हम अभी भी उरिच को नौकरी से निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं।"
'यरूशलम पोस्ट' के अनुसार, गोलान का इशारा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के वरिष्ठ सलाहकार योनातन उरिच पर लगे आरोपों की ओर है। सुरक्षा से जुड़े अपराधों - जिनमें गुप्त जानकारी लीक करना और सबूत नष्ट करना शामिल है - की जांच के चलते उरिच को नेतन्याहू से संपर्क करने से रोक दिया गया है। 'यरूशलम पोस्ट' के मुताबिक, ये आरोप उस घटना से जुड़े हैं जिसे "कतरगेट" (Qatargate) मामले के रूप में जाना जाता है। इसमें आरोप है कि उरिच और अन्य अधिकारियों ने इजरायल के भीतर कतर के पक्ष में प्रचार करने के लिए कतर से जुड़े स्रोतों से अवैध भुगतान लिया था। आज, मंगलवार को हुए चुनावों में विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच के लिए इज़राइल चुनाव समिति के फैसले ने यरुशलम में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
लिकुड पार्टी के प्रमुख और मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले को एक 'भूकंप' करार दिया और ज़ायोनी पार्टियों से अरब पार्टियों के साथ किसी भी तरह का गठबंधन न करने की अपील की। नेतन्याहू ने 'X' (ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा, "रा'अमगेट (Ra'amgate) मामला एक भूकंप की तरह है। उन्होंने इज़राइल में चुनाव चुरा लिए हैं! जज सोलबर्ग के ये बयान कि विदेशी ताकतों ने चुनावों में दखल दिया और अरब पार्टियों के पक्ष में वोटरों को रिश्वत दी, एक ऐसा झटका है जो पहले कभी नहीं देखा गया। यह लोकतंत्र पर एक हमला है, जिसका मकसद नेसेट (इज़राइली संसद) पर विदेशी ताकतों का कब्ज़ा कराना, इज़राइल का इस्लामीकरण करना और दक्षिणपंथी शासन को उखाड़ फेंकना है।
इसका नतीजा यह होगा कि IDF (इज़राइली सेना) हर मोर्चे पर - खासकर ईरान के खिलाफ - पीछे हटने और हारने के लिए मजबूर हो जाएगी। जब यह सामने आ गया है कि विदेशी ताकतों ने नेसेट पर कब्ज़ा करने की कोशिश की है, तो यह साफ है कि किसी भी ज़ायोनी पार्टी को 'रा'अम' (Ra'am) और 'जॉइंट लिस्ट' (Joint List) के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए। ये पार्टियां पैसे देकर वोट खरीद रही हैं ताकि नेसेट स्पीकर को बदला जा सके और एक ऐसी सरकार बनाई जा सके जो इज़राइल के लिए खतरनाक हो। हम मांग करते हैं कि शिन बेट (Shin Bet) और पुलिस अपने पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करके इन अपराधों की तुरंत जांच करें।"
यह मांग तब सामने आई है जब इज़राइल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष, जस्टिस नोम सोलबर्ग ने शिन बेट के प्रमुख डेविड ज़िनी से मंगलवार के चुनावों में विदेशी दखल के आरोपों की जांच करने को कहा। शिन बेट फिलहाल हाल ही में हुए चुनावों में कतरी (Qatari) प्रभाव के आरोपों की जांच कर रही है।