नयी दिल्ली
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शनिवार को म्यांमा की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और म्यांमा की नौसेनाओं के बीच अभियानगत स्तर पर समन्वय को मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के नए आयाम तलाशना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
भारतीय नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि एडमिरल त्रिपाठी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों की पुष्टि करती है। भारत और म्यांमा के रिश्ते आपसी सम्मान, विश्वास और साझा हितों पर आधारित हैं। विशेष रूप से, हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता इस संबंध को और मजबूत बनाती है।
इस यात्रा के दौरान एडमिरल त्रिपाठी म्यांमा के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे। वह म्यांमा के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च अधिकारी जनरल ये विन ऊ, रक्षा मंत्री जनरल यू ह्तुन आंग और म्यांमा नौसेना प्रमुख एडमिरल ह्तीन विन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में सहयोग बढ़ाने के संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
भारतीय नौसेना के अनुसार, इन वार्ताओं का मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त प्रशिक्षण और ऑपरेशनल समन्वय को बढ़ाने पर रहेगा। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सूचना साझाकरण, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है।
म्यांमा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी है। यह देश नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के साथ लगभग 1,640 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। इस भौगोलिक निकटता के कारण दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और संपर्क के कई आयाम जुड़े हुए हैं। म्यांमा के साथ मजबूत संबंध भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए भी बेहद अहम हैं।
अपनी यात्रा के दौरान एडमिरल त्रिपाठी म्यांमा नौसेना की मध्य कमान का भी दौरा करेंगे, जहां उन्हें नौसेना की परिचालन क्षमताओं और गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी। यह दौरा दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में, भारत और म्यांमा के बीच बढ़ता समुद्री सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।