भारत का प्रवासन संबंधी दृष्टिकोण गरिमा और अधिकारों के सम्मान पर आधारित: कीर्ति वर्धन सिंह

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-05-2026
 approach is based on dignity and respect for rights: Kirti Vardhan Singh
approach is based on dignity and respect for rights: Kirti Vardhan Singh

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत का प्रवासन संबंधी दृष्टिकोण जन-केंद्रित और गरिमा पर आधारित है, साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आवाजाही (मोबिलिटी) एक गतिशील वैश्विक अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग बनी रहेगी।
 
सिंह ने मंगलवार को यहां कहा, ‘‘प्रवासन प्रबंधन के प्रति भारत का दृष्टिकोण समग्र और व्यावहारिक है। यह समन्वित संस्थागत प्रयासों और व्यापक सामाजिक भागीदारी से प्रेरित है।’’
 
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘हमारे लोगों का कुशलक्षेम और उनकी सुरक्षा’’ भारत के दृष्टिकोण का केंद्रबिंदु है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘हमने भारतीय समुदाय कल्याण कोष और ‘मदद’ पोर्टल जैसी पहलों के माध्यम से प्रवासियों, विशेष रूप से कमजोर परिस्थितियों में रहने वालों को सहायता प्रदान करने के तंत्र को मजबूत किया है।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी त्वरित कांसुलर सेवाएं विदेशों में रहने वाले हमारे नागरिकों को समय पर सहायता, कानूनी, वित्तीय और बीमा कवरेज भी प्रदान करती हैं।”
 
सिंह रविवार को यहां पहुंचे थे और वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के तत्वावधान में चार से आठ मई तक आयोजित होने वाले दूसरे अंतरराष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा मंच (आईएमआरएफ) के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
 
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए वैश्विक समझौते पर एक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित किया।
 
सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि गोलमेज सम्मेलन में, उन्होंने सुरक्षित और नियमित प्रवासन को सुगम बनाने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों को रेखांकित किया। इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग, कांसुलर सेवाओं को मजबूत करना, प्रवासन और गतिशीलता समझौतों को संपन्न करना, तथा देश के कुशल श्रमिकों के कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण और प्रस्थान-पूर्व प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रवासन के प्रति हमारा दृष्टिकोण जनकेंद्रित बना हुआ है- जो गरिमा, समावेशन और अधिकारों के सम्मान पर आधारित है।’’