India's efforts towards self-reliance in the defence sector have reached new heights: DRDO Chairman Kamat
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वर्ष 2025 में भारतीय उद्योगों के माध्यम से निर्मित करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये मूल्य की, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित कई रक्षा प्रणालियों को शामिल करने के लिए 22 ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (एओएन) प्रदान की गई हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत ने कहा कि संस्थान के प्रयासों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जिन उल्लेखनीय प्रणालियों के लिए एओएन प्रदान की गई है उनमें एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस), पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली, त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ‘अनंत शस्त्र’, लंबी दूरी की वायु से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (एलआरएएससीएम), एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली (आईडीडीआईएस) एमके 2 तथा दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (बीवीआरएएएम) एस्ट्रा एमके-2 शामिल हैं।
इसमें अन्य प्रणालियों में एंटी-टैंक नाग मिसाइल प्रणाली (ट्रैक्ड) एमके-2, उन्नत हल्के वजन का टॉरपीडो, प्रोसेसर-आधारित मोर्ड माइन-नेक्स्ट जेनरेशन (पीबीएमएम एनजी), एयर-बोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यू एंड सी) एमके-1ए, माउंटेन रडार, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) एमके-1ए के लिए फुल मिशन सिम्युलेटर शामिल हैं।
एओएन खरीद प्रक्रिया की दिशा में पहला कदम होता है।
डीआरडीओ ने बृहस्पतिवार को अपनी 68वीं वर्षगांठ मनाई।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव कामत ने डीआरडीओ भवन में उपस्थित लोगों को संबोधित किया, जिसका सीधा प्रसारण संगठन की सभी प्रयोगशालाओं में किया गया।