India moving from digital to AI public infrastructure in next 5 years: Microsoft’s Rajiv Kumar
नई दिल्ली
माइक्रोसॉफ्ट IDC के प्रेसिडेंट और MD राजीव कुमार ने कहा कि भारत अगले पांच सालों में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से AI पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ने की राह पर है, क्योंकि देश आधार, UPI और डिजी यात्रा की सफलता को आगे बढ़ा रहा है। कुमार ने ANI को बताया, "मुझे लगता है कि भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से AI पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ने की राह पर है। क्योंकि DPI के साथ हमें बहुत अच्छी सफलता मिली है, जिसमें आधार, UPI और डिजी यात्रा जैसी सभी सेवाएं हर नागरिक तक पहुंची हैं। मैं देख रहा हूं कि देश अब डिजिटल से AI के स्तर पर कैसे आगे बढ़ेगा? और यह देखना रोमांचक है। अगले पांच सालों में मैं यही होता हुआ देख रहा हूं।"
हैदराबाद के पास स्थित माइक्रोसॉफ्ट के नए 'इंडिया साउथ सेंट्रल' डेटा सेंटर के बारे में बात करते हुए - जिसमें टॉलरेंस और रेजिलिएंस (सहनशीलता और लचीलेपन) के लिए तीन ज़ोन हैं - उन्होंने इसे एक रणनीतिक डेटा सेंटर बताया। उन्होंने कहा कि यह माइक्रोसॉफ्ट के सबसे बड़े डेटा सेंटरों में से एक है, जो सभी Azure सेवाएं चलाने में सक्षम है और इसे भविष्य में आने वाली नई सेवाओं के हिसाब से बढ़ाने (स्केल करने) के लिए बनाया गया है।
उन्होंने कहा, "रणनीतिक डेटा सेंटर वे होते हैं जो... यह माइक्रोसॉफ्ट के सबसे बड़े डेटा सेंटरों में से एक है, और रणनीतिक इसलिए है क्योंकि यह सभी Azure सेवाएं चला सकता है, और इसे ऐसी नई सेवाओं के लिए स्केल करने के लिए बनाया गया है जो अगले साल या भविष्य में आ सकती हैं।" कुमार ने कहा कि डेटा सेंटर विकसित करने का उनका अनुभव सकारात्मक रहा है। उन्होंने भारत के टेक्नोलॉजी लीडरशिप, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), अनुकूल नीतियों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और पूंजी व टैलेंट की उपलब्धता की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा, "भारत टेक्नोलॉजी लीडरशिप में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और DPI (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे देश ने पिछली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी को अपनाया और वास्तव में हर किसी के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला।" कुमार के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में कुल 20.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है, जिसमें तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा - इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग (कौशल विकास), और यह सुनिश्चित करना कि AI सॉवरेन (संप्रभु), सुरक्षित, स्केलेबल और सस्टेनेबल (टिकाऊ) हो। कुमार ने कहा, “सबसे पहली बात इंफ्रास्ट्रक्चर की है। देखिए, माइक्रोसॉफ्ट सच में भारत को AI-फर्स्ट देश बनाना चाहता है। इसके लिए आपको डेटा सेंटर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से शुरुआत करनी होगी, ताकि आप इन AI क्षमताओं को यूज़र्स और कस्टमर्स के करीब चला सकें।”
उन्होंने कहा कि स्कििलिंग (कौशल विकास) ज़रूरी है क्योंकि सिर्फ़ टेक्नोलॉजी होने से काम नहीं चलेगा अगर यूज़र्स को यह नहीं पता कि इसका इस्तेमाल कैसे करना है या AI को एंड-यूज़र्स तक कैसे पहुँचाना है।
कुमार ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि जब वे 2005 में देश लौटे थे, तब यहाँ एक या दो यूनिकॉर्न थे, जबकि आज इनकी संख्या 120 से ज़्यादा है। उन्होंने कहा, “अब ज़्यादातर स्टार्टअप्स अपनी सॉल्व की जा रही कस्टमर प्रॉब्लम के लिए AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।” कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में IIT दिल्ली के 'उन्नति' एक्सेलेरेटर में स्टार्टअप्स का रिव्यू किया। उन्होंने कहा कि जिन प्रॉब्लम एरियाज़ को स्टार्टअप्स ने चुना था और उन्हें हल करने के लिए AI का इस्तेमाल किया था, उसे देखना बहुत रोमांचक था।
सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) पर कुमार ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने “कार्बन नेगेटिव, वॉटर पॉजिटिव और ज़ीरो वेस्ट” बनने का लक्ष्य रखा है और हैदराबाद डेटा सेंटर में एयर-कूलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, “हम ऐसी टेक्नोलॉजी लाए हैं जो वॉटर-कूल्ड नहीं, बल्कि एयर-कूल्ड है। हमारे पास पानी का एक सीमित सिस्टम तो है, लेकिन हम बाहर से पानी नहीं ले रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि माइक्रोसॉफ्ट ने बोरवेल रिचार्ज और सोक पिट जैसे उपाय किए हैं और जून 2026 तक हैदराबाद फैसिलिटी के आस-पास के गाँवों में लगभग 50 लाख लीटर पानी की भरपाई की है।
बिजली की खपत पर कुमार ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल करेगा और भारत में 1,000 मेगावाट (यानी 1 गीगावाट) अतिरिक्त ऊर्जा पैदा करने के लिए कंपनियों के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “अभी तक, हमारी पार्टनरशिप के तहत उन्होंने 630 मेगावाट ग्रीन एनर्जी पैदा करना शुरू कर दिया है। इसलिए हम यह पक्का कर रहे हैं कि हम मौजूदा संसाधनों का इस्तेमाल न करें, बल्कि उनमें और बढ़ोतरी करें।”
कुमार ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के ग्लोबल क्लाउड नेटवर्क में 80 रीजन और लगभग 500 डेटा सेंटर शामिल हैं। ये सभी डेडिकेटेड फाइबर नेटवर्क से जुड़े हैं, जिनमें सब-सी केबल, ज़मीन पर बिछी केबल और ऑप्टिकल केबल शामिल हैं जो 'लास्ट माइल' तक पहुँचते हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया भर में मौजूद इन सभी डेटा सेंटर्स को जोड़ने के लिए हमारे पास एक डेडिकेटेड नेटवर्क है, जिसमें हैदराबाद वाला डेटा सेंटर भी शामिल है।”