उत्तर प्रदेश में रेरा का क्रियान्वयन पूरी तरह त्रुटिपूर्ण, रास में भाजपा सदस्य ने की संशोधन की मांग

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 27-03-2026
Implementation of RERA in Uttar Pradesh is completely flawed, BJP member in Rajya Sabha demands amendment
Implementation of RERA in Uttar Pradesh is completely flawed, BJP member in Rajya Sabha demands amendment

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने शुक्रवार को राज्यसभा में रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) और दिवाला कानूनों में व्यापक संशोधन की मांग करते हुए कहा कि देशभर में हजारों घर खरीदारों ने अपनी जीवन भर की बचत खर्च कर दी, लेकिन अब तक उन्हें फ्लैट नहीं मिले, जबकि बिल्डर दिवालिया घोषित होकर जवाबदेही से बच निकलते हैं।
 
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए बाजपेयी ने कहा कि केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) लागू किया और ‘इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया’ तथा राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण जैसे संस्थान स्थापित किए, लेकिन विशेषकर उत्तर प्रदेश में इसका क्रियान्वयन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ।
 
उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में रेरा का क्रियान्वयन पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। हजारों परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं और कई बिल्डर खुद को दिवालिया घोषित कर कानूनी जवाबदेही से बच गए हैं।”
 
सांसद ने कहा कि कई मामलों में फ्लैट बनने के बावजूद बिल्डरों ने सरकारी बकाया नहीं चुकाया, जिससे पंजीकरण अटक गए हैं और खरीदारों को कानूनी स्वामित्व नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा, “गलती बिल्डर करता है और सजा आम नागरिक को मिलती है।”
 
बाजपेयी ने मांग की कि दिवाला कानून में संशोधन कर ऐसा प्रावधान किया जाए कि बिल्डर के दिवालिया घोषित होने पर उसकी व्यक्तिगत संपत्तियां जब्त की जा सकें और गहन जांच के बाद कड़ी सजा दी जाए।
 
भाजपा सदस्य ने रेरा में देरी का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि बिल्डर के चूक करने पर जांच समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए और मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहने दिया जाना चाहिए।