होर्मुज संकट का असर: अमेरिका में पेट्रोल कीमतें 4 साल के उच्च स्तर पर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 06-05-2026
Impact of the Hormuz Crisis: Petrol Prices in the US at a 4-Year High
Impact of the Hormuz Crisis: Petrol Prices in the US at a 4-Year High

 

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में गैस (पेट्रोल) की औसत कीमत 4.50 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है, जो लगभग चार साल का उच्चतम स्तर है। इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण Strait of Hormuz में जारी गतिरोध को माना जा रहा है।

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, GasBuddy के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को रेगुलर पेट्रोल की औसत कीमत 4.51 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई। यह स्तर आखिरी बार जुलाई 2022 में देखा गया था। पिछले कुछ दिनों में ही पेट्रोल की कीमतों में 21 सेंट प्रति गैलन की बढ़ोतरी हुई है, जो उपभोक्ताओं पर सीधा असर डाल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा हालात बने रहे तो कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। GasBuddy के पेट्रोलियम विश्लेषक पैट्रिक डीहान के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल का स्टॉक पहले ही कई वर्षों के न्यूनतम स्तर पर है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन के कारण कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा।

दरअसल, ईरान में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक पहल शुरू की है। इसके तहत अमेरिकी सेंट्रल कमांड के नेतृत्व में व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित तरीके से जलडमरूमध्य से गुजरने में मदद की जा रही है। यह कदम तब उठाया गया जब अप्रैल की शुरुआत में Donald Trump ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का आदेश दिया था।

हालांकि, हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बावजूद ईरानी बलों ने कई बार व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की है और कुछ जहाजों को जब्त भी किया है। इसके अलावा अमेरिकी बलों पर भी हमले की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को बाधित करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “निर्दोष जहाजों को स्वतंत्र रूप से गुजरने दिया जाना चाहिए। हम टकराव नहीं चाहते, लेकिन किसी भी देश को वैश्विक व्यापार मार्गों को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जबकि अन्य क्रूड ऑयल की कीमतें भी 100 डॉलर के पार हैं। इससे साफ है कि ऊर्जा संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। जब तक इस संकट का समाधान नहीं निकलता, तब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलना मुश्किल नजर आता है।