विधानसभा सत्र के लिए जारी दिशा-निर्देश दुर्भाग्यपूर्ण: अशोक गहलोत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 17-01-2026
Guidelines issued for the assembly session are unfortunate: Ashok Gehlot
Guidelines issued for the assembly session are unfortunate: Ashok Gehlot

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर जारी दिशा-निर्देश को दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत बताया है। गहलोत ने इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है।
 
राज्य विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होना है।
 
गहलोत ने इस बारे में प्रकाशित समाचार का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘राजस्थान विधानसभा के आगामी सत्र के लिए जारी किए गए नए दिशा-निर्देश अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत हैं। माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी, आपने किसकी सलाह से ऐसा फैसला किया जिसको लेकर सभी विधायकों एवं जनता में प्रतिक्रिया तथा आक्रोश होना स्वाभाविक है।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘विधायक केवल एक क्षेत्र विशेष का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का प्रतिनिधि होता है। उसे राज्य स्तर के नीतिगत विषयों या पांच साल पुराने मामलों पर प्रश्न पूछने से रोकना और मंत्रियों को जवाबदेही से ‘छूट’ देना, सदन की गरिमा को कम करने जैसा है।’’
 
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष और विधायकों का काम सरकार की जवाबदेही तय करना है। यदि प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता ही नहीं रहेगी, तो विधानसभा का औचित्य क्या रह जाएगा? गहलोत ने लिखा, ‘‘यह अलोकतांत्रिक व्यवस्था कतई स्वीकार्य नहीं है। विधायिका का काम कार्यपालिका पर अंकुश रखना है, न कि कार्यपालिका की सुविधा अनुसार अपने अधिकार कम करना।’’
 
कांग्रेस नेता के अनुसार ऐसा आदेश संभवतः देश में पहली बार निकाला गया होगा जिससे विधायकों के अधिकारों को कम किया जा रहा है। बाक़ी विधानसभाएं अपने सदस्यों के अधिकार बढ़ाने का प्रयास करती हैं लेकिन यहां इसके विपरीत देखने को मिल रहा है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘विधायकों को राज्य स्तर के सवाल पूछने से रोकना और मंत्रियों को जवाबदेही से मुक्त करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। ऐसे आदेश को अविलंब वापस लेना चाहिए।’’
 
मामला सामने आने के बाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुक्रवार को कहा कि 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र में सदन की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार का कोई नया प्रावधान नहीं किया गया है। विधायकों के लिए जारी किए गए समस्त बुलेटिन पूर्व विधानसभाओं के सत्रों की भांति ही हैं।