आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत की पहली महिला विश्व चैम्पियन बनी मनीषा भानवाला की नजरें 2005 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में 57 किलोवर्ग में पदक जीतने पर है और इस अनुभवी पहलवान की ताकत उनके पिता है जो उनके दिल में बसते हैं ।
29 वर्ष की मनीषा ने कजाखस्तान के अस्ताना में इतिहास रच दिया जब वह सीनियर कुश्ती विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई । एशियाई खेलों की नाकामी की बखूबी भरपाई करते हुए उन्होंने कैरियर की सबसे बड़ी जीत हासिल की ।
एशियाई खेलों से खाली हाथ लौटी मनीषा ने अपने कोच वीरेंदर दहिया की सलाह मानकर विश्व चैम्पियनशिप पर पूरा फोकस रखा जिसकी उन्हें फायदा मिला ।
मनीषा ने भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा शनिवार को कराई गई बातचीत में कहा ,‘‘ एशियाई खेलों में किस्मत ने साथ नहीं दिया । मैं कोच से कुश्ती, अभ्यास और रिकवरी के बारे में पूछती रही । उन्होंने कहा कि अगला लक्ष्य विश्व चैम्पियनशिप होना चाहिये । मुझे अभी भी याद है कि उन्होंने कहा था कि ईश्वर ने मेरे लिये कुछ बड़ा सोच रखा है ।’’