पंजाब में बेअदबी कानून का पहला केस दर्ज

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 02-05-2026
First Case Under Sacrilege Law Registered in Punjab
First Case Under Sacrilege Law Registered in Punjab

 

चंडीगढ़

पंजाब में नए बेअदबी-रोधी कानून के लागू होने के बाद पहला मामला श्री मुक्तसर साहिब जिले में दर्ज किया गया है। यह मामला एक धार्मिक ग्रंथ के फटे पन्ने मिलने के बाद सामने आया, जिससे इलाके में संवेदनशीलता बढ़ गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना श्री मुक्तसर साहिब के मलोट क्षेत्र के कुचियां मोहल्ला की एक झुग्गी बस्ती में सामने आई। यहां ‘सुखमनी साहिब गुटका’ के कुछ फटे पन्ने मिलने की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी। शिकायत मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। बाद में इन पन्नों को सम्मानपूर्वक स्थानीय गुरुद्वारे को सौंप दिया गया।

इस मामले में पुलिस उपाधीक्षक हरजीत सिंह ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह घटना जानबूझकर की गई या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 और ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ की धारा 5 के तहत दर्ज की गई है। बीएनएस की धारा 299 के अनुसार, किसी धर्म या धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने के उद्देश्य से किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य एक गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

पंजाब सरकार ने हाल ही में इस नए बेअदबी-रोधी कानून को अधिसूचित किया था, जिसका उद्देश्य सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा और सम्मान को बनाए रखना है। इस कानून के तहत बेअदबी के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें न्यूनतम सात साल की कैद से लेकर अधिकतम उम्रकैद तक की सजा शामिल है। साथ ही दोषी पर दो लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

यदि किसी व्यक्ति द्वारा शांति भंग करने या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से साजिश के तहत बेअदबी की जाती है, तो सजा और भी कठोर हो जाती है। ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की कैद से लेकर उम्रकैद तक की सजा और पांच लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने 13 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून में संशोधन पारित किया था। इसका उद्देश्य राज्य में बेअदबी की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाना और धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना है।

फिलहाल, पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है और दोषियों की पहचान के लिए विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। यह मामला न केवल कानून के सख्त प्रावधानों की पहली परीक्षा है, बल्कि राज्य में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।