'दून बासमती' के पुनर्जीवन के प्रयास शुरू, देहरादून जिले में 160 किसानों ने इसकी रोपाई की

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 28-07-2026
Efforts begin to revive 'Doon Basmati', with 160 farmers planting it in Dehradun district.
Efforts begin to revive 'Doon Basmati', with 160 farmers planting it in Dehradun district.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
अपनी विशिष्ट सुगंध और लाजवाब स्वाद के लिए प्रसिद्ध देहरादून की पारंपरिक 'दून बासमती' के पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयास रंग ला रहे हैं और पिछले साल के सफल परीक्षण के बाद इस बार जिले में 75 हेक्टेयर में करीब 160 किसानों ने इसकी रोपाई शुरू की है ।
 
अधिकारियों के मुताबिक, दून बासमती के संरक्षण और संवर्धन के लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान परियोजन के समन्वित प्रयासों से न केवल इसकी खेती को दोबारा बढ़ावा दिया जा रहा है, बल्कि किसानों को बाजार उपलब्ध कराने, गुणवत्तापूर्ण बीज के संरक्षण, परीक्षण और ब्रांडिंग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है ।
 
देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि दून बासमती को पुनर्जीवित करने के लिए 2025 में किए गए शुरुआती परीक्षण के दौरान करीब 65 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती कराई गई थी, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए। उन्होंने बताया कि इसके बाद इस वर्ष दून बासमती की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर 75 हेक्टेयर किया गया है और जिले के 160 किसानों ने इस वर्ष इसकी रोपाई शुरू की है।
 
चौहान ने बताया कि सहसपुर और विकासनगर विकासखंड के बाद रायपुर तथा डोईवाला विकासखंड के किसान भी दून बासमती की खेती के प्रति उत्साह दिखा रहे हैं।
 
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दून बासमती को उसकी विशिष्ट सुगंध, गुणवत्ता और स्थानीय पहचान के साथ मजबूत ब्रांड के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय का अवसर मिल सके।
 
जिले के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि 2025 में करीब 65 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 100 किसानों ने इसकी खेती की थी और अब इस पारंपरिक फसल की ओर किसानों का रुझान और बढ़ रहा है ।
 
उन्होंने बताया कि रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) के माध्यम से किसानों से उनकी उपज की सीधे खरीद की गई। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जिला प्रशासन की पहल पर 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया, जिसके एवज में किसानों के खातों में 13 लाख रुपये से अधिक की धनराशि डाली गई।