आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव में किसी भी एक दल को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य में द्रविड़ दलों के नेतृत्व वाले गठबंधनों में विजय की अगुवाई वाली पार्टी को बाहरी समर्थन देने के मुद्दे पर मतभेद उभर आए हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) दोनों ही असहज हैं, क्योंकि कांग्रेस और अन्नाद्रमुक के एक वर्ग ने विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) को सरकार बनाने में बाहरी समर्थन देने की इच्छा जताई है।
चुनाव के बाद टीवीके की राजनीतिक संभावनाएं दोनों द्रविड़ दलों के गठबंधनों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करती दिख रही हैं, जिससे विभाजन की अटकलें लगने लगी हैं।
अन्ना द्रमुक के टिकट पर लालगुड़ी से जीतने वाली लीमा रोज मार्टिन ने कहा कि टीवीके को समर्थन देने पर बातचीत चल रही है। उनके दामाद आधव अर्जुन टीवीके के महासचिव हैं, जो विल्लीवक्कम से जीते हैं।
पांच मई को अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री ओ एस मणियन ने पार्टी महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी से मुलाकात के बाद कहा कि अन्नाद्रमुक, टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन नहीं देगी।