Delimitation played a key role in the NDA's landslide victory in Assam.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
असम चुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के पूर्व गढ़ों में उनके प्रभाव को कम करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन उन कई कारकों में से एक है, जिसकी बदौलत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने यहां शानदार प्रदर्शन किया और 126 में से रिकॉर्ड 102 सीट हासिल कीं।
राज्य में 2023 के परिसीमन के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया, जिसमें पूर्व की मुस्लिम बहुल कुछ सीट मूल निवासियों के लिए आरक्षित की गईं। इस परिसीमन ने इस विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों को अधिक सीट हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अल्पसंख्यक ‘वोट बैंक’ ने 35 सीट पर पिछले सभी विधानसभा चुनावों में खासकर कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन परिसीमन ने इसके प्रभाव को घटाकर 25 से भी कम सीट तक सीमित कर दिया।
विपक्ष द्वारा जीती गईं 24 में से अधिकतर सीट परिसीमन से अप्रभावित थीं। इन सीट में 22 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों के अपने पूर्व गढ़ों में प्रदर्शन में भारी गिरावट देखी गई है।
इस परिसीमन के कारण मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों का विखंडन हुआ और स्थानीय समुदाय के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों के साथ उन क्षेत्रों का विलय होने से ‘वोट बैंक’ कमजोर हो गया।
परिसीमन के बाद विधानसभा सीट की संख्या 126 ही रही, लेकिन अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट की संख्या बढ़ाई गई। यहां अनुसूचित जनजाति की संख्या 16 से बढ़ाकर 19 और अनुसूचित जाति की संख्या आठ से बढ़ाकर नौ कर दी गई।
बारपेटा और गोलपारा (पश्चिम) में बांग्ला भाषी मुसलमानों की बड़ी आबादी निवास करती है, जो क्रमशः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थीं। लेकिन यह दोनों सीट राजग ने कांग्रेस से छीन लीं।
परिसीमन का प्रभाव बोडोलैंड क्षेत्र की अन्य जनजाति आरक्षित सीट पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां उनकी सीट की संख्या 11 से बढ़कर 15 की गई।
राजग की सहयोगी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने इनमें से 10 सीट जीतीं, जबकि उसका एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव हार गया।
पिछले चुनावों में 16 सीट पर जीत हासिल करने वाली एआईयूडीएफ इस बार केवल दो सीट ही जीत पाई, जबकि रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक उम्मीदवार ने भी इन्हीं 25 सीट में से जीत दर्ज की।
बांग्ला भाषी मुस्लिम बाहुल्य 25 सीट पर बहुत कम प्रभाव रखने वाले सत्ताधारी गठबंधन ने यहां अपनी पकड़ बनाने के प्रयास किए और क्षेत्रीय पार्टी असम गण परिषद (एजीपी) ने समुदाय के 13 उम्मीदवारों को मैदान पर उतारा, लेकिन परिसीमन के बाद पार्टी में शमिल हुए मौजूदा विधायकों समेत कोई भी उम्मीदवार सीट नहीं जीत सका।