आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एयर इंडिया के निवर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने कहा है कि पिछले चार वर्षों में एयरलाइन की बुनियाद को फिर से मजबूत किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर विमानों की आपूर्ति न होने से इसकी वृद्धि और बेड़े के आधुनिकीकरण पर महत्वपूर्ण असर पड़ा है।
पद छोड़ने की घोषणा कर चुके विल्सन ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि वह इस वर्ष के अंत में पद से हटने के बाद किसी अन्य पूर्णकालिक कार्यकारी भूमिका में नहीं जाएंगे और सलाहकार एवं शिक्षण जैसे कार्यों पर ध्यान देंगे।
विल्सन ने सात अप्रैल को एयर इंडिया का सीईओ एवं प्रबंध निदेशक पद छोड़ने की घोषणा की थी। वह इस पद पर मई, 2022 में नियुक्त किए गए थे।
जनवरी, 2022 में निजीकरण के बाद एयर इंडिया फिलहाल व्यापक बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रही है। हालांकि, टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त स्वामित्व वाली एयरलाइन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एयर इंडिया के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल को 54 वर्षीय विल्सन ने ‘एक शानदार सफर’ बताते हुए कहा कि इस दौरान सांस्कृतिक बदलाव, चार एयरलाइंस के विलय, नई पहचान और उत्पाद उन्नयन जैसे कदम उठाए गए।
विल्सन ने कहा कि पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया की बुनियाद को फिर से मजबूत किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर विमानों की आपूर्ति न होने से इसकी वृद्धि और बेड़े के आधुनिकीकरण पर महत्वपूर्ण असर पड़ा है।