आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर किए गए नए हमलों की कड़ी आलोचना की। इसके साथ ही पार्टी ने उन पर तथा अन्य विपक्षी दलों पर वोट बैंक की राजनीति के लिए "सनातन के खिलाफ नफरत" फैलाने में लिप्त होने का आरोप लगाया।
भाजपा की प्रतिक्रिया उदयनिधि स्टालिन द्वारा मंगलवार को सनातन धर्म को "समाप्त" करने का आह्वान करने के बाद आयी है। स्टालिन ने दावा किया कि सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है। उन्होंने सितंबर 2023 में भी इस तरह की विवादास्पद टिप्पणी की थी।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि तमिलनाडु में द्रमुक की चुनावी हार के बावजूद, उदयनिधि स्टालिन फिर वही करने लगे हैं जो वे ‘‘सबसे अच्छा करते हैं - सनातन धर्म का अपमान और उसके खिलाफ नफरत फैलाना।’’
पूनावाला ने कहा, ‘‘उन्होंने अब विधानसभा में कहा है कि सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए। पिछली बार जब उन्होंने इस तरह की टिप्पणी की थी, तब उच्चतम न्यायालय ने भी उसे नफरती भाषण करार दिया था।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम .के. स्टालिन ने उस समय हुए विवाद को लेकर अपने बेटे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बना दिया, जबकि कांग्रेस ने भी उन टिप्पणियों की निंदा नहीं की।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता पूनावाला ने कहा, "चुनावी हार और लोगों द्वारा उनके हिंदू-विरोधी और सनातन-विरोधी दृष्टिकोण को खारिज किए जाने के बावजूद, उन्होंने कोई सबक नहीं लिया है। वे अब भी सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं।"
विपक्षी नेताओं का उल्लेख करते हुए पूनावाला ने कहा कि हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और द्रमुख अध्यक्ष एम के स्टालिन को झटका लगा, लेकिन भाजपा के विरोधी दलों ने अब भी सनातन धर्म के प्रति अपना दृष्टिकोण नहीं बदला है।
पूनावाला ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक पर भी "सनातन धर्म के प्रति नफरत" फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "सनातन धर्म का अपमान करना उनका राजनीतिक मॉडल बन गया है और वोट बैंक की राजनीति के लिए सनातन धर्म का अनादर करना उनकी पहचान बन गई है। तमिलनाडु की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।"