आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एक अध्ययन में पाया गया है कि 11-12 साल की उम्र में रोजाना ज्यादा कदम चलने वाले बच्चों में एक साल बाद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम कम पाया गया।
‘द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) नेटवर्क ओपन’ में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्षों में यह भी सामने आया कि रोजाना 12,000 या उससे अधिक कदम चलने का अधिक कदमों और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध बना रहा। आंकड़ों में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि एक निश्चित संख्या के बाद अधिक कदम चलने का लाभ बढ़ना बंद हो गया।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सबसे अधिक कदम चलने वाले किशोरों के मस्तिष्क के उन हिस्सों में भी अंतर देखा गया, जो शरीर की गतिविधियों और मनोदशा से जुड़े हैं। इन अंतर ने कदमों की संख्या और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझाने में मदद की।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय में केन्सियोलॉजी की सहायक प्रोफेसर अमांडा पालुच ने कहा कि किशोरावस्था मस्तिष्क के विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण दौर है इसलिए यह देखना उत्साहजनक है कि शारीरिक गतिविधि के फायदे दोनों पर पड़ते हैं।
पालुच ने कहा, ‘‘यह ऐसी स्थिति नहीं है कि या तो पूरा लाभ मिले या बिल्कुल भी लाभ न मिले। इसका फायदा उठाने के लिए किशोरों का उत्कृष्ट स्तर का खिलाड़ी होना जरूरी नहीं है। रोजाना जितने कदम आप पहले से चल रहे हैं, उसमें 1,000 से 2,000 कदम की बढ़ोतरी भी मस्तिष्क की बेहतर संरचना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर परिणामों से संबंधित पाई गई। इसके बाद कदमों की संख्या बढ़ाने के साथ यह लाभ और बढ़ता जाता है।’’