Calorie-reduced diets can lead to weight loss, but also a risk of weight gain: Study
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वजन घटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कैलोरी कम करने वाली डाइट काफी लोकप्रिय हुई है। हालांकि, शोध बताते हैं कि ऐसी डाइट से शुरु में वजन घट सकता है, लेकिन लंबे समय तक कम वजन रखना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है और कई लोगों का वजन दोबारा बढ़ जाता है।
कैलोरी घटाने वाली डाइट में व्यक्ति अपने भोजन से मिलने वाली ऊर्जा (कैलोरी) की मात्रा कम करता है। इसमें इंटरमिटेंट फास्टिंग (दिन के कुछ निश्चित समय में ही भोजन करना), अल्टरनेट डे फास्टिंग (एक दिन छोड़कर सीमित या बिना कैलोरी का सेवन) और फास्ट 800 जैसी डाइट शामिल हैं, जिनमें तेजी से वजन घटाने के लिए कैलोरी बहुत कम कर दी जाती हैं।
इसका मूल सिद्धांत यह है कि शरीर जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे कम कैलोरी लेने पर वह जमा वसा का इस्तेमाल करता है, जिससे समय के साथ वजन कम हो सकता है।
हालांकि, ऐसी डाइट हमेशा के लिए नहीं होती। आमतौर पर इसमें कुछ समय तक कैलोरी सीमित करने के बाद ऐसी भोजन शैली अपनाई जाती है, जिससे लंबे समय तक स्वस्थ यानी जरूरत के अनुसार कम वजन बनाए रखा जा सके।
कुछ डाइट में रोजाना 500 से 600 कैलोरी कम लेने की सलाह दी जाती है, जबकि बहुत कम कैलोरी वाली डाइट में पूरे दिन में 800 से कम कैलोरी लेने को कहा जाता है।