नई दिल्ली।
आज के दौर में फिल्मों की सफलता का आकलन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से किया जाता है, लेकिन टिकट बिक्री किसी फिल्म की लोकप्रियता की एक अलग तस्वीर पेश करती है। उस दौर में जब सिनेमाघरों की संख्या सीमित थी और प्रचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, कई पुरानी फिल्मों ने करोड़ों दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा और महीनों तक पर्दे पर बनी रहीं।
फिल्म विजन द्वारा साझा की गई एक सूची में भारत में सबसे ज्यादा टिकट बिक्री करने वाली सात फिल्मों का जिक्र किया गया है। इस सूची में 1975 में रिलीज हुई अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले सबसे ऊपर है। फिल्म के करीब 12.73 करोड़ टिकट बिकने का अनुमान है।
रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी शोले में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कुमार और अमजद खान प्रमुख भूमिकाओं में थे। रिलीज के बाद फिल्म ने दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और लंबे समय तक सिनेमाघरों में चलती रही। फिल्म के किरदार और संवाद आज भी भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा हैं।
इस सूची में दूसरे स्थान पर एसएस राजामौली की 2017 की फिल्म बाहुबली 2: द कन्क्लूजन है, जिसके करीब 10.77 करोड़ टिकट बिकने की बात कही गई है। प्रभास अभिनीत इस फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता थी। खासतौर पर ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ सवाल ने फिल्म की चर्चा को रिलीज से पहले ही काफी बढ़ा दिया था।
तीसरे स्थान पर दिलीप कुमार, पृथ्वीराज कपूर और मधुबाला अभिनीत 1960 की ऐतिहासिक फिल्म मुगल-ए-आजम है। इसके करीब 9.17 करोड़ टिकट बिकने का अनुमान है।
इसके बाद महबूब खान की क्लासिक फिल्म ** मदर इंडिया ** का नाम आता है। नरगिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार अभिनीत इस फिल्म के करीब 8.89 करोड़ टिकट बिकने की बात कही गई है। फिल्म को ऑस्कर के लिए भी नामांकन मिला था।
सलमान खान और माधुरी दीक्षित की ** हम आपके हैं कौन..!** इस सूची में पांचवें स्थान पर है। 1994 में रिलीज हुई इस पारिवारिक फिल्म के करीब 7.79 करोड़ टिकट बिकने का अनुमान है। फिल्म ने 1990 के दशक में पारिवारिक और संगीतप्रधान फिल्मों की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी।
छठे स्थान पर दिलीप कुमार की ** गंगा जमुना ** है, जिसे करीब 6.36 करोड़ दर्शकों द्वारा देखे जाने का अनुमान लगाया गया है। वहीं मनोज कुमार की 1981 में रिलीज हुई ** क्रांति ** करीब 6.15 करोड़ टिकटों की अनुमानित बिक्री के साथ सातवें स्थान पर है।
इन आंकड़ों को लेकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुरानी फिल्मों की टिकट बिक्री के आंकड़े पूरी तरह आधिकारिक या केंद्रीकृत रिकॉर्ड पर आधारित नहीं हैं। उस समय भारत में बॉक्स ऑफिस और टिकट बिक्री को ट्रैक करने की कोई एकीकृत व्यवस्था नहीं थी। इसलिए अलग-अलग ट्रेड स्रोतों में आंकड़ों को लेकर अंतर देखने को मिल सकता है।
फिर भी ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि किसी फिल्म की लोकप्रियता को केवल उसकी कमाई से नहीं मापा जा सकता। टिकटों की संख्या यह बताती है कि कितने लोग वास्तव में सिनेमाघरों तक पहुंचे।
आज टिकटों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन रिकॉर्ड लगातार नए स्तर पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में दर्शकों की वास्तविक संख्या और टिकट बिक्री का आंकड़ा किसी फिल्म की पहुंच और लंबे समय तक कायम रहने वाली लोकप्रियता को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जा सकता है।