राज बब्बर ने अपनी दिवंगत पत्नी स्मिता पाटिल को उनकी 71वीं जयंती पर याद किया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 17-10-2026
Raj Babbar remembers late wife Smita Patil on 71st birth anniversary, says ‘I miss her’
Raj Babbar remembers late wife Smita Patil on 71st birth anniversary, says ‘I miss her’

 

मुंबई (महाराष्ट्र) 
 
दिग्गज अभिनेता-राजनेता राज बब्बर ने अपनी दिवंगत पत्नी और मशहूर अभिनेत्री स्मिता पाटिल को उनकी 71वीं जयंती पर याद किया। उन्होंने स्मिता की असाधारण प्रतिभा, उनके स्नेहपूर्ण स्वभाव और भारतीय सिनेमा पर छोड़ी गई उनकी गहरी छाप को याद किया। शनिवार को राज बब्बर ने अपने इंस्टाग्राम पर स्मिता की एक तस्वीर साझा की और उन्हें श्रद्धांजलि दी। स्मिता का निधन 1986 में 31 साल की उम्र में हो गया था। उन्हें "बेहद संवेदनशील" कलाकार बताते हुए, राज ने कहा कि स्मिता ने अपने निभाए हर किरदार में एक अनोखी गहराई भर दी थी।
 
उन्होंने लिखा, "स्मिता में एक दुर्लभ संवेदनशीलता थी। भले ही उनका सफर बहुत छोटा रहा, लेकिन उनकी कला ने एक अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने केवल किरदारों को निभाया ही नहीं, बल्कि उनमें जान फूंक दी।" राज बब्बर ने यह भी बताया कि वे उन्हें कितना याद करते हैं और उन खूबियों को याद किया जो स्मिता को खास बनाती थीं। उनके साथ अपने निजी रिश्ते को याद करते हुए, उन्होंने स्मिता के स्नेहपूर्ण स्वभाव और "असाधारण प्रतिभा" का जिक्र किया और उन्हें जयंती पर श्रद्धांजलि दी।
 
उन्होंने आगे कहा, "मैं उन्हें बहुत याद करता हूँ। उनका स्नेह, उनकी असाधारण प्रतिभा और वे सभी बातें जो उन्हें इतना खास बनाती थीं। स्मिता पाटिल को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूँ। उनकी विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है, छू लेती है और लोगों के दिलों में बसी हुई है।" राज बब्बर ने यह भी कहा कि सिनेमा में स्मिता का योगदान आज भी उनके काम और उन लोगों के जरिए जीवित है, जिनके जीवन को उन्होंने प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि भले ही कलाकार शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनका काम उन्हें दर्शकों के दिलों में जिंदा रखता है।
 
उन्होंने लिखा, "कलाकार जब बुलावा आता है तो इस दुनिया से चले जाते हैं - लेकिन स्मिता अपने पीछे एक हिस्सा छोड़ गईं, जो उन सभी लोगों के दिलों में बसा है जिन्हें उन्होंने छुआ था।" स्मिता पाटिल भारत के 'पैरेलल सिनेमा' (समानांतर सिनेमा) आंदोलन की सबसे प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक थीं, खासकर 1970 और 1980 के दशक में। अपने दमदार अभिनय और जटिल किरदारों को बखूबी निभाने की क्षमता के लिए जानी जाने वालीं स्मिता ने 'मंथन', 'बाजार', 'अर्ध सत्य' और 'वारिस' जैसी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा में एक खास जगह बनाई।
 
दिसंबर 1986 में उनका निधन हो गया, जिससे उनका करियर असमय समाप्त हो गया। उनके निधन से कुछ हफ्ते पहले ही उन्होंने अपने बेटे प्रतीक बब्बर को जन्म दिया था। अपनी मृत्यु के समय वह केवल 31 वर्ष की थीं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए, स्मिता को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 'पद्म श्री' से नवाज़ा गया।
उनके निधन के दशकों बाद भी, फिल्म प्रेमी आज भी उनके अभिनय को याद करते हैं। भारत में 'पैरेलल सिनेमा' (समानांतर सिनेमा) और यथार्थवादी अभिनय पर होने वाली चर्चाओं में उनके काम का आज भी अहम स्थान है।
 
उनकी आखिरी फिल्मों में से एक थी 'गलियों का बादशाह', जिसका निर्देशन शेर जंग सिंह ने किया था। इस फिल्म में स्मिता पाटिल के अलावा राज कुमार, हेमा मालिनी, मिथुन चक्रवर्ती, पूनम ढिल्लों, अरुणा ईरानी, ​​रंजीत, डैनी डेन्जोंगपा, ओम शिवपुरी और इफ्तिखार जैसे कई कलाकार शामिल थे।