पैपराज़ी बनाम जया बच्चन: कैमरों की चमक में टकराता सम्मान और असहमति

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 04-01-2026
Paparazzi vs. Jaya Bachchan: Respect and disagreement clash amidst the glare of cameras.
Paparazzi vs. Jaya Bachchan: Respect and disagreement clash amidst the glare of cameras.

 

नई दिल्ली।

बॉलीवुड में पैपराज़ी और सितारों के रिश्ते हमेशा से तनाव, टकराव और समझौते के बीच झूलते रहे हैं। लेकिन जब बात जया बच्चन की आती है, तो यह रिश्ता अक्सर खुली टकराहट में बदल जाता है। कैमरों की फ्लैश लाइट देखते ही जया बच्चन का असहज होना और फिर गुस्से में प्रतिक्रिया देना कोई नई बात नहीं है। हालिया घटनाक्रम ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

‘अशिक्षित’ और ‘बेस्वाद’ टिप्पणी से भड़का विवाद

पिछले कुछ समय पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जया बच्चन ने पैपराज़ी को लेकर जो टिप्पणी की—“ये लोग कौन हैं? गंदे कपड़े पहनकर मोबाइल कैमरे लेकर आ जाते हैं। क्या इनके पास कोई शैक्षणिक योग्यता है?”—वह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। इस टिप्पणी को केवल गुस्से की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक पूरे पेशे का अपमान बताया गया।

इस बयान के बाद आम दर्शकों से लेकर फिल्म इंडस्ट्री के भीतर तक, कई लोगों ने जया बच्चन के व्यवहार पर सवाल उठाए। कुछ ने इसे उनकी “स्पष्टवादिता” कहा, तो अधिकांश ने इसे असभ्य और अपमानजनक करार दिया।

फोटोग्राफर बरिंदर चावला का तीखा पलटवार

अब इस विवाद में मशहूर सेलिब्रिटी फोटोग्राफर बरिंदर चावला की एंट्री ने मामले को और गरमा दिया है। एक इंटरव्यू में बरिंदर ने बेहद साफ और व्यंग्यात्मक लहजे में जया बच्चन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा,“जया जी एक वरिष्ठ अभिनेत्री हैं, एक सम्मानित नाम हैं। लेकिन जिस तरह से उन्होंने मेरे सहकर्मियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, वह बेहद दुखद है। उन्हें हमारी शिक्षा, हमारे कपड़े या हमारे पेशे पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। हम इस घटना से बहुत आहत हैं।”

बरिंदर चावला ने यह भी कहा कि यदि किसी सेलिब्रिटी को कैमरों से परेशानी है, तो सम्मानजनक संवाद हमेशा एक विकल्प होता है।

‘ना कहना भी एक कला है’

अपने बयान में बरिंदर ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बड़े सितारों ने पैपराज़ी से शालीन तरीके से सीमाएं तय की हैं।उन्होंने कहा,“आलिया-रणबीर हों या विराट-अनुष्का, उन्होंने हमसे साफ कहा कि उनके बच्चों की तस्वीरें न ली जाएं। हमने हमेशा उनकी बात मानी। अगर जया जी भी यही चाहतीं, तो शांति से कह सकती थीं। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर किसी का अपमान करना सही नहीं है।”

यह टिप्पणी दरअसल बॉलीवुड में सेलिब्रिटी–पैपराज़ी एथिक्स पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है—क्या असहमति जताने का तरीका अपमान होना चाहिए?

रेड कार्पेट बनाम गुप्त द्वार

बरिंदर चावला ने इंडस्ट्री के एक अलिखित नियम की ओर भी इशारा किया।उनके अनुसार,“हर इवेंट में एंट्री के दो रास्ते होते हैं—एक रेड कार्पेट और दूसरा बैक या गुप्त एंट्रेंस। अगर कोई लाइमलाइट में नहीं आना चाहता, तो आयोजक हमेशा गुप्त द्वार की व्यवस्था करते हैं। लेकिन यह कहना कि आप रेड कार्पेट पर चलेंगे और तस्वीरें नहीं खिंचवाएंगे—यह हास्यास्पद और अस्वीकार्य है।”

यह बयान जया बच्चन के व्यवहार पर सीधा सवाल है, क्योंकि वे अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों में रेड कार्पेट पर दिखती हैं, जहां कैमरों की मौजूदगी स्वाभाविक होती है।

सोशल मीडिया की अदालत में जया बच्चन

जया बच्चन का यह वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई यूज़र्स ने कहा कि सम्मान उम्र या पद से नहीं, व्यवहार से मिलता है। वहीं कुछ समर्थकों ने तर्क दिया कि लगातार कैमरों की घेराबंदी किसी के भी सब्र की परीक्षा ले सकती है।

लेकिन इस बहस में एक बात साफ रही—पैपराज़ी को “अशिक्षित” और “बेस्वाद” कहना, बड़ी संख्या में लोगों को अस्वीकार्य लगा।

बहिष्कार की चर्चा और इंडस्ट्री में असर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पैपराज़ी के एक वर्ग में यह चर्चा है कि वे जया बच्चन का पूरी तरह बहिष्कार कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बॉलीवुड में एक असामान्य स्थिति होगी—जहां एक दिग्गज अभिनेत्री सार्वजनिक आयोजनों में कैमरों से लगभग गायब हो सकती हैं।

यह भी दिलचस्प है कि जया बच्चन के पति, महानायक अमिताभ बच्चन, हमेशा मीडिया और पैपराज़ी के साथ संतुलित और सम्मानजनक व्यवहार के लिए जाने जाते रहे हैं। यही कारण है कि लोग इस पूरे विवाद को और भी ज्यादा विरोधाभासी मान रहे हैं।

सम्मान दोतरफा रास्ता है

जया बच्चन बनाम पैपराज़ी विवाद सिर्फ एक सेलिब्रिटी के गुस्से की कहानी नहीं है। यह बॉलीवुड की बदलती संस्कृति, मीडिया की भूमिका और सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार की सीमाओं पर एक बड़ी बहस है।सेलिब्रिटी होना निजता पर समझौता जरूर मांगता है, लेकिन पैपराज़ी होना भी अपमान सहने की शर्त नहीं हो सकती। सम्मान एकतरफा नहीं, बल्कि दोनों ओर से निभाया जाने वाला रिश्ता है।अब देखना यह है कि यह टकराव किसी समझौते में बदलता है या फिर बॉलीवुड में सितारों और कैमरों के बीच की खाई और गहरी होती चली जाएगी।