मुंबई:
फिल्म निर्माता और निर्देशक Mahesh Bhatt की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा का विषय रही है। अब उनकी बड़ी बेटी Pooja Bhatt ने एक बार फिर अपने पिता के उस फैसले पर खुलकर बात की है, जब उन्होंने अभिनेत्री Soni Razdan से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म स्वीकार किया था।
हाल ही में पत्रकार विक्की लालवानी को दिए एक इंटरव्यू में पूजा भट्ट ने अपने पिता के जीवन के इस संवेदनशील अध्याय पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता का सम्मान इसलिए करती हैं क्योंकि उन्होंने अपनी भावनाओं और रिश्तों को लेकर कभी दिखावा नहीं किया। उन्होंने समाज के सामने एक झूठी तस्वीर पेश करने के बजाय सच्चाई को स्वीकार करना बेहतर समझा।
गौरतलब है कि महेश भट्ट ने वर्ष 1986 में सोनी राजदान से विवाह किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उस समय उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था। उस दौरान उन्होंने अपनी पहली पत्नी किरण भट्ट से तलाक नहीं लिया था। महेश भट्ट की पहली शादी से पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं, जबकि दूसरी शादी से Alia Bhatt और Shaheen Bhatt का जन्म हुआ।
पूजा भट्ट ने बातचीत के दौरान कहा कि उनके पिता ने अपनी बदलती भावनाओं को स्वीकार किया, न कि दोहरी जिंदगी जीने का रास्ता चुना। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को यह एहसास हो जाए कि उसकी भावनाएं बदल चुकी हैं, तो क्या उसे केवल समाज की अपेक्षाओं के कारण उसी रिश्ते में बने रहना चाहिए या फिर ईमानदारी के साथ सच को स्वीकार करना चाहिए।
पूजा ने अपने पिता की ईमानदारी का बचाव करते हुए कहा कि महेश भट्ट ने कभी उनकी मां से नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता की एक विशेषता यह रही है कि जब वह किसी का हाथ थामते हैं तो उसे आसानी से छोड़ते नहीं हैं। उनके अनुसार परिवार के रिश्ते समय के साथ बदले जरूर, लेकिन टूटे नहीं।
भट्ट परिवार को अक्सर बॉलीवुड के सबसे असामान्य और चर्चित परिवारों में गिना जाता है। इसके बावजूद परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच संबंध बने रहे। पूजा भट्ट कई मौकों पर यह कह चुकी हैं कि उनके रिश्ते परिवार के दोनों पक्षों के साथ अच्छे रहे हैं और उन्होंने हमेशा सभी को परिवार का हिस्सा माना है।
पूजा भट्ट की ताजा टिप्पणी ने एक बार फिर महेश भट्ट के निजी जीवन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को किसी विवाद या सनसनी के रूप में नहीं, बल्कि ईमानदारी, स्वीकार्यता और जटिल परिस्थितियों के बीच रिश्तों को बनाए रखने की कहानी के रूप में पेश किया। उनके अनुसार यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसने तमाम उतार-चढ़ाव और सामाजिक चर्चाओं के बावजूद अपने संबंधों को जीवित रखा और आगे बढ़ाया।