लकी अली: संगीत की दुनिया के जादूगर का विनम्र सफर और नई शुरुआत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 10-02-2026
Lucky Ali: The humble journey and new beginnings of the music wizard
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नई दिल्ली

तीन दशकों से भी लंबे करियर में लकी अली ने संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। नब्बे के दशक के मशहूर गीत 'ओ सनम' से लेकर हाल के गाने 'तू जाने है कहां' तक, उनकी आवाज़ हमेशा लोगों को मंत्रमुग्ध करती रही है। हालांकि इस संगीत के बादशाह ने कभी खुद को ‘स्टार’ मानने की कोशिश नहीं की। विनम्रता से वह हमेशा कहते हैं कि श्रोताओं का प्यार उनके लिए एक आशीर्वाद और उपहार मात्र है।

हाल ही में एक साक्षात्कार में लकी अली ने जीवन की कठिन सच्चाई को साझा किया। उन्होंने कहा, “सफलता स्थायी नहीं होती, एक समय ऐसा आता है जब सब कुछ रुक जाता है। मैंने इसे स्वीकार कर लिया है।” यह बात उनके व्यक्तित्व की गहराई और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है।

लकी अली मानते हैं कि जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है, वह अपने भीतर की सच्चाई की खोज करने लगता है। यही खोज आज उन्हें अपने निजी जीवन और संगीत में मार्गदर्शन दे रही है। उनका करियर 1996 में एल्बम 'शुनाह' से शुरू हुआ। उस समय उनकी भारी-भरकम और मधुर आवाज़ वॉकमैन युग की युवाओं के लिए सुकून और राहत का प्रतीक बन गई थी।

इसके बाद उन्होंने 'गोरी तेरी आंखें कहे', 'तेरी याद' जैसे गानों से खुद को इंडी-पॉप आइकन के रूप में स्थापित किया। बॉलीवुड में भी उन्होंने कई सदाबहार गीत दिए, जैसे 'एक पल का जीना' और 'ना तुम जानो ना हम', लेकिन वह कभी फिल्मी ट्रेंड्स का पालन करने के लिए अपने स्वाभाव को नहीं बदलते। लकी अली का मानना है कि बॉलीवुड के प्रारूप अनुसार गाना उनके लिए कभी सहज नहीं रहा।

वे अक्सर स्वेच्छा से एकांतवास में चले जाते हैं और अपनी मर्जी से लौटते हैं। लंबे अंतराल के बाद, अब वह अपने नए गीत 'तू जाने है कहां' के साथ वापसी कर रहे हैं। यह गीत भी उनके निजी जीवन के अनुभवों, भावनाओं और तनाव से प्रेरित है, जैसा कि उनके पुराने गीतों में दिखाई देता रहा है।

लकी अली का यह सफर यह सिखाता है कि सफलता अस्थायी हो सकती है, लेकिन संगीत और ईमानदारी हमेशा कायम रहती है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से यह भी साबित किया है कि निजी संतुलन और आत्म-खोज की यात्रा सफलता से भी अधिक महत्वपूर्ण है।