नई दिल्ली
विश्व सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित आयोजन, 98वें ऑस्कर पुरस्कार की अंतिम नामांकन सूची को लेकर इंटरनेट पर भारी उत्साह देखने को मिल रहा था। भारतीय सिनेप्रेमियों की निगाहें खास तौर पर निर्देशक नीरज घवान की बहुचर्चित फिल्म ‘होमबाउंड’ पर टिकी थीं। लेकिन जैसे ही अंतिम सूची जारी हुई, उम्मीदें टूट गईं।
फिल्म सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी की अंतिम दौड़ से बाहर हो गई है। कान फिल्म महोत्सव में प्रीमियर के बाद से ही ‘होमबाउंड’ को दुनियाभर में सराहना मिल रही थी। यहां तक कि दिग्गज फिल्मकार मार्टिन स्कॉर्सेसी ने भी फिल्म की खुलकर प्रशंसा की थी।
अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में लगातार सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बाद यह माना जा रहा था कि दशकों से चला आ रहा भारत का ऑस्कर सूखा इस बार खत्म हो सकता है। पिछले वर्ष निर्माता करण जौहर ने भी उम्मीद जताई थी कि ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए चयनित 15 फिल्मों में ‘होमबाउंड’ की स्थिति मजबूत है।
हालांकि, अकादमी द्वारा जारी की गई अंतिम सूची में भारत को निराशा हाथ लगी। सूची में अर्जेंटीना की ‘बेलेन’, ब्राजील की ‘द सीक्रेट एजेंट’, फ्रांस की ‘इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट’, जर्मनी की ‘साउंड ऑफ फॉलिंग’, इराक की ‘द प्रेसिडेंट्स केक’, जापान की ‘कोकुहो’ और दक्षिण कोरिया की ‘नो अदर चॉइस’ सहित 15 देशों की फिल्मों ने जगह बनाई।
इसके अलावा, फ़िलिस्तीनी फ़िल्म ‘फ़िलिस्तीन 36’ और ताइवानी फ़िल्म ‘लेफ्ट-हैंडेड गर्ल’ भी अंतिम सूची में शामिल हैं, लेकिन नीरज घवान की ‘होमबाउंड’ को जगह नहीं मिल सकी।
अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों के मुताबिक, इस बार मुकाबला बेहद कड़ा था। ‘होमबाउंड’ के बाहर होने की खबर सामने आते ही निर्देशक, फिल्म की टीम और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा जाहिर की। एक बार फिर भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी पहचान मिलने की उम्मीद अधूरी रह गई है।