एमएसओ का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, लिए गए कई अहम फैसले

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari • 2 Months ago
एमएसओ का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, लिए गए कई अहम फैसले
एमएसओ का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, लिए गए कई अहम फैसले

 

आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली 
 
भारत के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया यानी एम एस ओ का दो दिवसीय सम्मेलन आज यहां इदारा ए शरिया सुलतानगंज में समाप्त हुआ। इन दो दिनों में कई सम्मेलन और परिचर्चाएं आयोजित की गईं। अंतिम दिन भारत सरकार के नाम एक मांग पत्र भी तैयार किया गया.
 
पहले दिन देश के कई प्रख्यात पत्रकारों, एक्सपर्ट और उलमा ने संबोधित किया जिसमें भारत के नौजवान मुसलमान के सामने समस्याओं, चुनौतियों, लक्ष्य और मांगों पर गहन विचार विमर्श हुआ। दूसरे दिन मांगों पर विषद चर्चा के बाद मांग पत्र तैयार किया गया। मुस्लिम युवा छात्रों ने मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में उन्हें सम्मिलित कर सहयोग लेने की अपील की है.

MSO के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉक्टर शुजात अली क़ादरी ने कहाकि भारत के सभी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाने वाली इस्लामी शिक्षा के सिलेबस पर गहन विचार विमर्श की जरूरत है क्योंकि इसका अधिकांश भाग सूफिज्म और भारतीय परंपरा के नजरिए से उचित नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहाकि सरकार को इस शिक्षा के सिलेबस के रिवीव का काम करना चाहिए ताकि केन्द्रीय और राज्य सरकारों के विश्वविद्यालयों के इस्लामी शिक्षा अध्ययन विभाग के सिलेबस को अधिक से अधिक समावेशी, भारतीय दृष्टिकोण अनुरूप और सूफिज्म के दृष्टिकोण से तैयार किया जा सके.
 
 
इदारा ए शरिया के संस्थापक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मौलाना गुलाम रसूल बलयावी ने कहाकि मुस्लिम समाज में पिछड़ेपन की समस्या को दूर करने के लिए हमें शिक्षा और स्वरोजगार को महत्व देना चाहिए. उन्होंने कहा कि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों और मदरसे की इमारत का हम अधिक से अधिक रोजगार की ट्रेनिंग में इस्तेमाल करें. उन्होंने व्यवसायिक शिक्षा के लिए मुख्य तालीम को मदरसे में लाने के जोर दिया और कहाकि हमारी तरक्की का यही रास्ता हो सकता है.
 
दिल्ली से आए कंपनी सेक्रेटरी और स्टार्टअप के जानकार कुमार अनिकेत ने कहाकि मुस्लिम नौजवानों में बहुत टैलेंट होता है, अगर वह बैंकिंग सेक्टर और तकनीकी शिक्षा का स्तर बढ़ा दें तो उनकी सफलता के काफी आयाम खुल जाएंगे. हम चाहते हैं कि भारत के मुस्लिम नौजवान अपनी योग्यता का भरपूर इस्तेमाल करें और देश की सभी विकासवादी योजनाओं का लाभ उठाएं.
 
मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष मोदस्सर अशरफ़ी ने कहाकि देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तत्वों को बचाने, विकसित करने और संजोने के लिए युवाओं को प्रेरित करना आवश्यक है। यह देखा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर युवाओं को देश को कमज़ोर करने वाली ताक़तों, विचारधाराओं, साज़िश और गतिविधियों को समझने, सूंघने और सुलझाने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए.
 
 
हमारे संगठन ने गौरवपूर्ण तरीक़े से इस चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को वहाबी विचारधारा को समझने और इससे निपटने का प्रशिक्षण और शिक्षा दी जाती है। कई सफल प्रयोगों में हमने कई कट्टरवादी तत्वों को सूफ़ीवाद की विचारधारा की तरफ़ मोड़कर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है.
 
जीशान करीमी (राष्ट्रीय कॅम्पस सचिव) ने कहा कि हमें दरगाहों और खानकाहों से समावेशी विचार मिलता है. यह विचार हमारे निजी कल्याण का भी एक बड़ा स्रोत है क्योंकि जब हम समाज के सभी वर्गों के साथ संबंध मधुर रखते हैं तो हमें उनके तरक्की के रास्ते और संस्कृति का भी ज्ञान होता है. जो अंतत: हमें व्यावसायिक और सामाजिक लाभ देता है.
 
मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन  की मांगें
1.भारत और राज्य सरकारों के वह सभी विश्वविद्यालय जो इस्लामी शिक्षा, अरबी, फारसी और उर्दू भाषा विज्ञान विभाग चलाते हैं, उनके सिलेबस को पूरी तरह से जांचने की आवश्यकता है ताकि इन सिलेबस में भारत विरोधी और सांप्रदायिक सामग्री को हटाकर अधिकांश सूफिज्म, देशप्रेम के अनुरूप और समावेशी सिलेबस को डाला जा सके.
 
2.बैंकों से स्वरोजगार के लिए मुद्रा लोन को अधिक उदार बनाया जाए। प्रधानमंत्री 15 सूत्रीय अल्पसंख्यक कल्याण बिंदुओं पर तेज़ी लाने के लिए बैंकों को बाध्य किया जाए.
 
3.विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा में मुस्लिम नौजवानों के एनरोलमेंट बढ़ाने के लिए राजस्थान सरकार की तर्ज़ पर सभी सरकारी संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सभी वर्गों की महिलाओं की ट्यूशन फ़ीस माफ़ की जाए।
 
4.व्यवसायिक शिक्षा जैसे आईटीआई में प्रवेश के लिए आवश्यक न्यूनतम शिक्षा कक्षा 8 की जाए.
 
5.देश के सभी विश्ववियालयों में ग्रेजुएशन के एडमिशन के लिए इन सभी मदरसा डिग्रियों को मान्यता दी जाए, जिन्हें हैदराबाद के मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय ने मान्यता दी हुई है.
 
6.सभी केंद्रीय, राज्य सरकारों और निजी सेक्टर के विश्वविद्यालय हैदराबाद के मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय की इक्वालेंस लिस्ट को मान्यता दें.
 
7 देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय परीक्षा में उर्दू में पेपर हल करने का विकल्प दें.
 
 
यह भी रहे शामिल
दो दिवसीय सम्मेलन मे देश के 21 राज्यों से 131 डेलीगेट ने हिस्सा लिया जिनमे असम से मुजममिल हुसैन, त्रिपुरा से नज़रुल, वेस्ट बंगाल से ऐड्वकेट असफाक अस्वी, झारखंड से रज़ा फराज़, ऑडिश से अबु हुरैराह, राजस्थान से हबीब, मध्य प्रदेश से अमान रजवी, महाराष्ट्र से सकलेन काजी, कर्नाटक से जैन शरीफ, केरल से अली सकाफी, तेलंगाना से शहीर पाशा, उत्तराखंड से आरिफुल क़ादरी, पंजाब से शाम दिन क़ादरी, दिल्ली से तहसीन, उत्तरप्रदेश से यूसुफ नक़्शबंदी आदि प्रमुख हैं.