ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
भारतीय शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विश्व-प्रसिद्ध कलाकार रूबल नागी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने परिवर्तनकारी योगदान के लिए प्रतिष्ठित 1 मिलियन डॉलर का GEMS एजुकेशन ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 जीतकर भारत का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है। वर्की फाउंडेशन द्वारा UNESCO के सहयोग से दिए जाने वाले इस सम्मान की घोषणा दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट के दौरान की गई, जहाँ दुनिया भर के नेता और नीति-निर्माता एकत्रित होते हैं।
पिछले दो दशकों में रूबल नागी ने अपने रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन (RNAF) के माध्यम से भारत के 100 से अधिक वंचित समुदायों में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर स्थापित किए हैं। इन केंद्रों ने उन बच्चों के लिए संरचित शिक्षा का रास्ता खोला है जिन्होंने कभी स्कूल का दरवाज़ा नहीं देखा, साथ ही औपचारिक शिक्षा प्रणाली में पहले से मौजूद बच्चों को रेमेडियल सपोर्ट और क्रिएटिव एनरिचमेंट प्रदान किया है। उनके कार्य की पहचान बने “लिविंग वॉल्स ऑफ़ लर्निंग”—छोड़ी हुई दीवारों पर बनी इंटरैक्टिव पेंटिंग्स—साक्षरता, अंकगणित, विज्ञान, स्वच्छता, इतिहास, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक ज़िम्मेदारी को जीवंत तरीके से सिखाती हैं। ये दीवारें केवल कला नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले को सक्रिय लर्निंग स्पेस में बदल देती हैं, जहाँ बच्चे, माता-पिता और समुदाय एक साथ सीखते और जुड़ते हैं।

रूबल नागी का शिक्षा मॉडल गरीबी, बाल श्रम, कम उम्र में विवाह, अनियमित उपस्थिति और बुनियादी ढांचे की कमी जैसी वास्तविक चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। लचीले शेड्यूल, रीसायकल की गई सामग्रियों से हैंड्स-ऑन लर्निंग और प्रैक्टिकल स्किल्स पर ज़ोर शिक्षा को न केवल सुलभ बनाता है, बल्कि जीवन से सीधे जोड़ता है। नतीजतन, उनके कार्यक्रमों ने ड्रॉपआउट दर को 50 प्रतिशत से अधिक कम किया है और बच्चों के लंबे समय तक स्कूल में टिके रहने में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने 600 से ज्यादा वॉलंटियर और पेड शिक्षकों को प्रशिक्षित कर एक ऐसा स्केलेबल मॉडल खड़ा किया है, जो बच्चों की शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक ज़रूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकता है।
अपनी पुरस्कार राशि का उपयोग रूबल नागी एक ऐसे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना में करने की योजना बना रही हैं, जो मुफ्त वोकेशनल और डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण देगा—जिसका उद्देश्य लाखों वंचित बच्चों और युवाओं के जीवन में स्थायी बदलाव लाना है। शिक्षा के साथ-साथ वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कलाकार और शहरी नवीनीकरण की अग्रणी भी हैं। 850 से अधिक पेंटिंग्स और मूर्तियों की रचनाकार रूबल का काम दुनिया भर में 200 से अधिक प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुका है। वह राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित होने वाली पहली कलाकार रही हैं, और उनका कार्य भारत के राष्ट्रपति के स्थायी संग्रह का हिस्सा है।

जीजामाता पुरस्कार, GR8 अवॉर्ड, MAP नोबल आर्टिस्ट अवॉर्ड और HELLO! ऊर्जा अवॉर्ड जैसे सम्मानों से अलंकृत रूबल नागी, 2015 में शुरू हुए ग्लोबल टीचर प्राइज को जीतने वाली दसवीं शिक्षक हैं। इस उपलब्धि के साथ वह उन चुनिंदा वैश्विक शिक्षकों की श्रेणी में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने शिक्षा को उम्मीद, सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाकर दुनिया भर में अनगिनत ज़िंदगियों को बदला है।