गंगा-जमुनी तहजीबः मुस्लिम भाईयों को भी रहता है गंगासागर मेले का इंतजार

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] • 1 Years ago
गंगा-जमुनी तहजीबः मुस्लिम भाईयों को भी रहता है गंगासागर मेले का इंतजार
गंगा-जमुनी तहजीबः मुस्लिम भाईयों को भी रहता है गंगासागर मेले का इंतजार

 

जयनारायण प्रसाद

हर साल मकर संक्रांति में पश्चिम बंगाल के गंगा सागर में मेला लगता है. हिंदुओं में कहावत है ‘सब तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार’. अमूमन, 14 जनवरी को मकर संक्राति मनाई जाती है और इस दिन गंगासागर में डुबकी लगाने के लिए दूरदराज के लाखों तीर्थयात्री यहां जुटते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले में सदियों से लगने वाला यह गंगासागर मेला हिंदू-मुस्लिम सद्भाव और सौहार्द का एक बड़ा मेला है.

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कोलकाता से गंगासागर मेला क्षेत्र तक की दूरी अमूमन 150 किलोमीटर है. असल में पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले में एक द्वीप हे, जिसका नाम है सागर है. इसी द्वीप के एक हिस्से में यह ‘गंगासागर मेला’ लगता है. संपूर्ण सागर द्वीप का कुल क्षेत्र है 224.3 वर्ग किलोमीटर. इस द्वीप के लगभग 12.26 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गंगासागर मेला लगता है.

गंगासागर में सद्भाव से चलती है सबकी जीविका

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सागर द्वीप की कुल आबादी साढ़े तीन लाख के आसपास है. वर्ष 2011 के बाद से कोरोना और दूसरी वजहों से सागर द्वीप की जनगणना का काम रुका हुआ है. सागर द्वीप की कुल आबादी में 65 फीसद हिंदू है. 28 से 30 प्रतिशत मुस्लिम हैं.

बाकी आदिवासी और दूसरी जातियां हैं. सागर द्वीप यानी गंगासागर क्षेत्र की मुख्य खेती पान, मिर्च और तरबूज है. यहां के साठ प्रतिशत लोगों की जीविका खेती पर निर्भर है. बाकी आबादी मछली और झींगा पालन पर आश्रित है.

सालभर करते हैं गंगासागर मेले की प्रतीक्षा

सागर द्वीप के लोग गंगासागर मेले का सालभर बेसब्री से इंतजार करते हैं. दिसंबर का आधा महीना जैसे ही बीतता है, तो सागर द्वीप में चहल-पहल थोड़ी बढ़ जाती है. जनवरी आते-आते सागर द्वीप का संपूर्ण क्षेत्र एक अलग तरह के जोश, उम्मीद और उमंग से भर जाता है.

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दक्षिण चौबीस परगना जिला प्रशासन की ओर से गंगासागर मेले की तैयारी शुरू हो जाती है. यहां की उत्ताल लहरों में फेरी, लांच और जलपोतों की आवाजाही के लिए अस्थायी जेटियों का निर्माण आरंभ हो जाता है. ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग इस काम को अंजाम देते हैं.

रंग-बिरंगी रोशनी से सजता है कपिल मुनि का मंदिर

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जनवरी के पहले हफ्ते से गंगासागर मेला क्षेत्र में कपिल मुनि का मंदिर रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया जाता है. इस काम में हिंदू और मुस्लिम दोनों लगते हैं. दूरदराज के तीर्थयात्रियों के रहने के लिए छावनी और भीड़ पर नजर रखने के लिए ऊंचे-ऊंचे वॉच टावर बनाए जाते हैं,उसमें भी हिंदू-मुस्लिम दोनों तबके के मजदूर काम करते हैं.

मेला क्षेत्र की सड़कें दुरुस्त होने लगती हैं. मेला क्षेत्र में चाय-बिस्कुट और फूल-माला की जो दुकानें लगती हैं, उसमें भी हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय की भागीदारी रहती है. यह सद्भाव और सौहार्द की एक बढ़िया मिसाल है. 

सागर द्वीप से थोड़ी दूरी पर है सुंदरवन


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सागर द्वीप से थोड़ी दूरी पर है सुंदरवन. सुंदरवन रॉयल बंगाल टाइगर के लिए दुनिया भर में मशहूर है. सुंदरवन 4,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां के लोगों की जिंदगी बहुत जटिल है. चारों तरफ पानी ही पानी है.

वह भी खारा पानी. मुश्किल से सुंदरवन के कुछ जिलों में पीने का पानी उपलब्ध है. बाकी जिलों में पीने का पानी बंगाल सरकार उपलब्ध कराती है. अगर कोलकाता या बाहर के राज्यों से कोई पर्यटक सुंदरवन के रॉयल बंगाल टाइगर को देखने आते हैं, तो उन्हें पीने का पानी जलयान / लांच/ नाव पर ही दे दिया जाता है.

यह पेयजल कोलकाता से खरीद कर पहले से उस जलयान में रख दिया जाता है, क्योंकि सुंदरवन में उपलब्ध पीने का पानी खारा है, जिसे कोई पी नहीं सकता. कहते हैं कि सुंदरवन वेनिस से दस गुना बड़ा है.

सुंदरवन और बांग्लादेश दोनों है आसपास

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गंगासागर यानी सागर द्वीप के एक छोर पर है सुंदरवन और दूसरे छोर पर बांग्लादेश है. सुंदरवन का ज्यादातर हिस्सा बांग्लादेश में पड़ गया है. सिर्फ थोड़ा-सा हिस्सा हिंदुस्तान यानी बंगाल में पड़ता है. बांग्लादेश को छूता हुआ एक हिस्सा है, तो दूसरी ओर विशाल बंगाल की खाड़ी है.

दक्षिण चौबीस परगना जिले में है 102 द्वीप

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दक्षिण चौबीस परगना जिले में सागर द्वीप, सुंदरवन द्वीप और घोड़ामारा द्वीप समेत कुल 102 द्वीप है. इतने सारे द्वीपों में से सिर्फ 54 में लोग बसते हैं. बाकी द्वीप हमेशा जलमग्न रहता है. इन द्वीपों में रहने वाले लोगों की जिंदगी मुश्किलों से भरी है. समुद्र का पानी हमेशा बढ़ता रहता है, इसलिए यहां के लोग हमेशा विस्थापित होते रहते हैं.

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हिंदुस्तान में जितने सारे द्वीप है, सागर उन द्वीपों में सबसे बड़ा द्वीप है. इस क्षेत्र को हिंदुस्तान का सबसे बड़ा डेल्टा भी कहा जाता है.

संकट से हमेशा घिरा रहता है घोड़ामारा द्वीप

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गंगासागर मेला क्षेत्र से नजदीक ही एक द्वीप है ‘घोड़मारा’. समुद्री उफान के कारण इस द्वीप के लोग हमेशा विस्थापन झेलते रहते हैं. पिछले कुछ सालों में पानी के फैलाव के कारण ‘घोड़मारा द्वीप’ के छह सौ परिवार विस्थापित हो चुके हैं. घोड़मारा द्वीप की कुल आबादी पांच हजार है.