US Green Card suspension may trigger talent shifts across IT firms, says Harish Bijoor
बेंगलुरु (कर्नाटक)
'हरीश बिजूर कंसल्ट्स इंक.' के फाउंडर और ब्रांड एक्सपर्ट हरीश बिजूर ने कहा कि अमेरिकी सरकार द्वारा प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों को ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम से सस्पेंड करने से, परमानेंट रेजिडेंसी (स्थायी निवास) का इंतज़ार कर रहे कर्मचारी ऐसी कंपनियों में जा सकते हैं जो अभी भी उनके एप्लीकेशन को स्पॉन्सर कर सकती हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में टैलेंट के इधर-उधर जाने की संभावना पर ज़ोर दिया।
बिजूर ने ANI से कहा, "यह एक बड़ा बदलाव और बड़ा कदम है।" उन्होंने अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो और HCL टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड करने का ज़िक्र किया। बिजूर ने कहा कि यह कदम इस रास्ते को पूरी तरह से खत्म करने के बजाय सिर्फ़ सस्पेंशन (कुछ समय के लिए रोकना) जैसा लग रहा है, जिससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि इसे कब बहाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "यह सस्पेंशन जैसा लग रहा है," और आगे कहा कि "कोई नहीं जानता कि इसे कब बहाल किया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि इस कदम से वे कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं जो पहले से ही परमानेंट रेजिडेंसी की कतार में हैं, और कुछ कर्मचारी नौकरी बदलने के बारे में सोच सकते हैं।
बिजूर ने कहा, "अगर आपके पास सब्र नहीं है, तो आप उम्मीद कर सकते हैं कि बहुत से लोग इन आठ कंपनियों से निकलकर उन कंपनियों में जाना चाहेंगे जहाँ ग्रीन कार्ड की संभावना अभी भी है।" अमेरिकी श्रम विभाग ने सिस्टम के कथित दुरुपयोग की संघीय जांच के बीच कई प्रमुख टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग कंपनियों को सस्पेंड कर दिया। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी सस्पेंड की गईं, जबकि नौ विश्वविद्यालयों को अमेरिकी वेतन से कम वेतन देने के आरोपों पर जांच का सामना करना पड़ा।
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि कंपनियों ने सामूहिक रूप से लाखों विदेशी कर्मचारियों की मांग की थी और उन्हें लाखों H-1B वीज़ा मंज़ूरी और परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन मिले थे। प्रशासन ने आगे कहा कि इस कार्रवाई का मकसद विदेशी हायरिंग से जुड़ी चिंताओं को दूर करना और अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा करना है।
इस अपडेट पर प्रतिक्रिया देते हुए TCS ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के किसी भी निर्देश का पालन करेगी और उसकी अमेरिकी वर्कफोर्स रणनीति स्थानीय हायरिंग पर आधारित है। कंपनी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उसके PERM एप्लीकेशन की संख्या सिंगल डिजिट में रही है और उसे उम्मीद नहीं है कि इस सस्पेंशन से उसकी वर्कफोर्स रणनीति या ग्राहकों के साथ संबंधों पर कोई असर पड़ेगा। इसके अलावा, नैसकॉम (Nasscom) ने कहा कि इस फ़ैसले का असर इमिग्रेशन के एक खास रास्ते पर पड़ा है और इसे स्किल्ड टैलेंट की आवाजाही (skilled talent mobility) के बड़े मुद्दे के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए।
उसने यह भी कहा कि भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में H-1B वीज़ा पर अपनी निर्भरता कम की है और साथ ही अमेरिका में स्थानीय स्तर पर लोगों को काम पर रखने और घरेलू वर्कफ़ोर्स तैयार करने पर ज़ोर दिया है।
HCL टेक्नोलॉजीज़ के पूर्व CEO विनीत नायर ने कहा कि इस रोक से उन कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है जो परमानेंट रेज़िडेंसी का इंतज़ार कर रहे हैं, और कुछ कर्मचारी ऐसी कंपनियों में जा सकते हैं जो अभी भी उनके एप्लीकेशन को स्पॉन्सर कर सकती हैं।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि भारतीय प्रोफ़ेशनल्स की आवाजाही पर लगी पाबंदियों का एक अनचाहा नतीजा यह हो सकता है कि अमेरिकी कंपनियाँ ज़्यादा टेक्नोलॉजी का काम भारत में शिफ्ट करने के लिए प्रोत्साहित हों, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।