नई दिल्ली
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिया जाने वाला ऋण हाल के वर्षों में बैंक ऋण विस्तार का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है। सरकारी नीतिगत समर्थन, क्रेडिट गारंटी योजनाओं और उद्यम (Udyam) पंजीकरण के माध्यम से बढ़ती औपचारिकता ने इस क्षेत्र को मजबूत किया है। यह बात एक्सिस बैंक की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में एमएसएमई क्षेत्र का गैर-खाद्य बैंक ऋण में 22 प्रतिशत योगदान रहा। इससे कुल गैर-खाद्य ऋण में एमएसएमई की हिस्सेदारी बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएसएमई ऋण में निरंतर वृद्धि के पीछे कई कारक हैं, जिनमें कम ब्याज दरें, सरकार समर्थित क्रेडिट-लॉस गारंटी और बैंकों द्वारा अपनाई जा रही तकनीक आधारित, डेटा-ड्रिवन अंडरराइटिंग प्रमुख हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि “सरकारी गारंटी और उद्यम पंजीकरण को बढ़ावा देने वाली पहलों से एमएसएमई ऋण विस्तार को गति मिली है।”
सरकारी क्रेडिट गारंटी योजनाओं ने ऋणदाताओं का भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 में जहां गारंटी की संख्या लगभग 52 लाख थी, वहीं दिसंबर 2024 तक यह बढ़कर एक करोड़ से अधिक हो गई। इसी अवधि में स्वीकृत गारंटी राशि 2.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
उद्यम पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण बढ़ने से अधिक एमएसएमई औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़े हैं। इससे बैंकों को बेहतर डेटा उपलब्ध हुआ, जिससे नए और छोटे कारोबारियों को ऋण देना आसान हुआ।
इसके साथ ही, जीएसटी रिटर्न और यूटिलिटी बिल जैसे वैकल्पिक डेटा स्रोतों के उपयोग से बैंकों ने ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, नीतिगत समर्थन, तकनीक और औपचारिकता के इस संयोजन ने एमएसएमई क्षेत्र में ऋण प्रवाह को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है।