मुजफ्फरपुर की शाही लीची की महक पहुंची सात समुंदर पार

Story by  सेराज अनवर | Published by  [email protected] • 1 Years ago
मुजफ्फरपुर की शाही लीची

सेराज अनवर / पटना

लीची और वह भी शाही, बात ही अलग है. बिहार की शाही लीची की मिठास अब सात समुंदर पार भी फैल रही है. पूरब से पश्चिम तक लीची का व्यापार शुरू हो चुका है. अब मुजफ्फरपुर की लीची हवाई जहाज से लंदन तक जा रही है और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी स्वाद चख रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में लीची के लंदन जाने की चर्चा की, तो बिहार के किसानों का सीना चौड़ा हो गया.

77वें मन की बात में प्रधानमंत्री ने मुजफ्फरपुर की लीची की चर्चा करते हुए कहा कि इसके अनूठे स्वाद हैं. उन्होंने कहा कि 2018 में शाही लीची को जीआई टैग दिलाया गया.  इससे देश का गौरव बढ़ा है. मुजफ्फरपुर उत्तरी बिहार का एक प्रमुख शहर है.

यह बूढ़ी गण्डक नदी के किनारे बसा हुआ है. अपने सूती वस्त्र उद्योग, लाह (लाख) की चूड़ियों, शहद तथा आम और लीची जैसे फलों के उम्दा उत्पादन के लिये यह जिला पूरे विश्व में जाना जाता है, खासकर यहां की शाही लीची का कोई जोड़ नहीं है.

हवाई जहाज से लंदन गयी लीची

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में शाही लीची को भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री (जीआई टैग) मिला, तो यह प्रमाणपत्र पाने वाला बिहार का चौथा कृषि उत्पाद हो गया. इसके पहले जर्दालु आम, कतरनी चावल और मगही पान को यह प्रमाणपत्र मिल चुका है.

मोदी ने कहा कि जीआई टैग ने शाही लीची की पहचान मजबूत की है. इससे किसानों को ज्यादा फायदा होगा. पहली बार बिहार की शाही लीची हवाई मार्ग से लंदन भेजी गई. मुजफ्फरपुर, बिहार ही नहीं पूरे विश्व में लीची को लेकर मशहूर है. यहां की लीची देश-दुनिया के लगभग सभी भागों में जाती है. गर्मी के महीनों में लोगों के खास पसंदीदा फल में लीची सबसे प्रचलित है, जिसे हर राज्य के लोग बड़े चाव से खाते हैं. 

प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को गिफ्ट

मुजफ्फरपुर की शाही लीची देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के साथ-साथ अन्य वीआईपी लोगों को भी जिला प्रशासन के द्वारा गिफ्ट के रूप में भेजी जाती है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजने की कई साल से परंपरा रही है.

प्रत्येक साल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लीची भेजने के लिए व्यापक तैयारी होती है. लीची में लाली आने के साथ ही कृषि और उद्यान विभाग बाग का चयन कर लेते हैं. फिर इसकी निगरानी की जाती है. खाने लायक होते ही लीची को तोड़ कर पैकिंग की जाती है. रेफ्रिजरेटर वैन से लीची को सड़क मार्ग से दिल्ली भेजी जाती है.

शाही लीची की खासियत

पूर्णतः पकने के बाद लीची का रंग गुलाबी और लाल हो जाता है. लीची के अंदर दूधिया सफेद भाग विटामिन सी से युक्त होता है. लीची में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम के साथ-साथ प्रोटीन खनिज पदार्थ फास्फोरस आदि पाए जाते हैं. जिसकी वजह से इसका उपयोग स्क्वैश, कार्डियल, शिरप, आर. टी. एस., रस इत्यादि बनाने में किया जाता है.

लीची की खेती बिहार के मुजफ्फरपुर के साथ-साथ देहरादून, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र और झारखंड में भी की जाती है.,  लेकिन वहां विशिष्ट जलवायु नहीं होने के कारण इसके फल छोटे होते हैं. गुणवत्ता के आधार पर अभी तक मुजफ्फरपुर की लीची का स्थान सबसे प्रमुख है.

यह लीची की एक खास प्रकार की प्रजाति है. राज्य के मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, बेगूसराय और बिहार के एग्रो क्लाइमेटिक जोन-1 के निकटवर्ती इलाकों में मुख्य रूप से इसकी खेती होती है.  मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और उसके आस-पास के इलाकों में पैदा होनेवाली लीची काफी रसदार और शुगर ऐसिड सम्मिश्रण के साथ बेहतरीन खुशूबू वाली होती है. श् ऐसा कहा जाता है कि मिट्टी में कैल्शियम की उच्च मात्रा की वजह से यहां की लीची दूसरे इलाकों से बेहतर होती है.

400 करोड़ का व्यापार

बिहार में हर साल लीची का तकरीबन 400 करोड़ का व्यापार होता है. देश में उत्पादन होने वाले 1 लाख टन में से 50 फीसदी  से अधिक लीची बिहार में होती है. देश में कुल लीची की खेती 83 हजार हेक्टेयर में होती है.

बिहार में 32 से 35 हजार हेक्टेयर में लीची के बगान हैं. इससे तकरीबन 40 हजार किसान परिवार जुड़े हैं. अपनी अलग पहचान और स्वाद से लोगों की पहली पसंद बनने वाली लीची का पेड़ सदाबहार होता है, जिसकी ऊंचाई मध्यम होती है. मुजफ्फरपुर में दो तरह की लीची पैदा होती है.

शाही और चाइना. जिसमें शाही लीची सबसे मशहूर है. शाही लीची की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चाइना लीची के मुकाबले काफी बड़ी होती है और सबसे पहले पककर तैयार हो जाती है. हालांकि गर्म हवाओं और नमी नहीं होने के कारण शाही लीची का फल अकसर फट जाता है. ऐसे में वो चाइना लीची के आकार से थोड़ा छोटा होता है.

मार्केटिंग का तरीका हुआ हाईटेक

बाजार से शाही लीची खत्म हो चुका है. अभी चाइना ही बाजार में लोगों के लिए उपलब्ध है. पिछले 2 साल से लीची उत्पादक किसान, मौसम और कोरोना की मार झेलने को विवश हैं. अच्छी उपज के बावजूद बाहर के व्यापारियों के नहीं आने से लीची किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.

लॉकडाउन के मद्देनजर मुजफ्फरपुर की शाही लीची की मार्केटिंग का तरीका थोड़ा हाईटेक हुआ है. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की मदद से इसे ऑनलाइन बेचने का मंसूबा तैयार हुआ. इसके लिए चार हजार लीची किसानों को जोड़ा गया. 

लीची को दुबई भेजने के लिए वहां के 10 व्यापारियों से संपर्क किया गया. दूसरी ओर, कई किसानों ने अपने स्तर से भी सौदा किया. मुजफ्फरपुर के पत्रकार कौशिक बताते हैं कि गत साल फरवरी में केंद्र सरकार ने उन्नत लीची कार्यक्रम की शुरुआत की थी.

इस कार्यक्रम का मकसद बगानों का उन्नयन, लीची का उत्पादन को दोगुना करना तथा कम दामों में बाजार में उपलब्ध कराना था. वहीं, किसानों के लिए एक एप भी बनाया जा रहा है, जिससे लीची का ऑनलाइन आर्डर किया जा सकता है. मुजफ्फरपुर की लीची की धूम बिहार के लिए गर्व की बात है.