न्यूयॉर्क
संयुक्त राष्ट्र एक गंभीर वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। संगठन के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अगर सदस्य देशों ने समय पर अपने बकाया अंशदान का भुगतान नहीं किया और वित्तीय ढांचे में सुधार नहीं हुआ, तो संयुक्त राष्ट्र “तत्काल वित्तीय पतन” का सामना कर सकता है।
गुटेरेस ने हाल ही में सभी सदस्य देशों को एक पत्र भेजकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि या तो सदस्य देश अपनी जिम्मेदारियों का समय पर और पूरा भुगतान करें, या फिर संयुक्त राष्ट्र को अपने बजट नियमों में बुनियादी बदलाव करने होंगे। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, गुटेरेस ने चेताया कि मौजूदा हालात में संगठन के पास आगे काम जारी रखने के लिए आवश्यक नकदी और तरलता नहीं बची है।
शुक्रवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता फरहान हक ने भी इस संकट को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “अब भुगतान के लिए ‘अब या कभी नहीं’ जैसी स्थिति बन चुकी है। हमारे पास पहले की तरह नकद भंडार नहीं हैं, जिससे हम साल भर सुचारू रूप से काम कर सकें।”
हालांकि गुटेरेस ने किसी एक देश का नाम नहीं लिया, लेकिन यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुपक्षीय संस्थाओं के लिए अमेरिका की वित्तीय सहायता में कटौती का रुख अपनाया है। ट्रंप प्रशासन ने कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों से हटने की योजना की घोषणा की है और तथाकथित “बोर्ड ऑफ पीस” पहल को आगे बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र को हाशिये पर डालने की कोशिश हो सकती है।
ह्यूमन राइट्स वॉच में संयुक्त राष्ट्र निदेशक लुई चार्बोनो ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि ट्रंप का बोर्ड एक तरह का “पे-टू-प्ले” वैश्विक क्लब लगता है, जिसमें स्थायी सदस्यता के लिए एक अरब डॉलर की फीस बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारों को ऐसे विकल्पों पर पैसा खर्च करने के बजाय संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।
वर्तमान व्यवस्था के तहत संयुक्त राष्ट्र में सदस्य देशों का योगदान उनकी आर्थिक क्षमता, जीडीपी और कर्ज जैसे मानकों पर आधारित होता है। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के कोर बजट का 22 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि चीन 20 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बावजूद, गुटेरेस ने बताया कि 2025 के अंत तक बकाया राशि रिकॉर्ड 1.57 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।
हालात की गंभीरता इस बात से भी झलकती है कि 2026 के लिए 3.45 अरब डॉलर का बजट मंजूर होने के बावजूद, खर्च में 7 प्रतिशत कटौती करनी पड़ी है। गुटेरेस ने चेताया कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो जुलाई तक संयुक्त राष्ट्र का नकद भंडार पूरी तरह खत्म हो सकता है। उनके शब्दों में, संगठन एक ऐसे “काफ्काई चक्र” में फंसा है, जहां उसे ऐसे पैसे लौटाने पड़ते हैं, जो वास्तव में उसके पास मौजूद ही नहीं हैं।