पाकिस्तान में बलोच महिला के कथित जबरन गायब होने का मामला, सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-01-2026
The case of the alleged forced disappearance of a Baloch woman in Pakistan has led to serious allegations against security forces.
The case of the alleged forced disappearance of a Baloch woman in Pakistan has led to serious allegations against security forces.

 

बलूचिस्तान (पाकिस्तान)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से कथित जबरन गुमशुदगी का एक और मामला सामने आया है। हब चौकी इलाके में एक बलोच महिला के पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के बाद लापता होने की खबर ने एक बार फिर मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर आक्रोश बढ़ा दिया है, खासकर महिलाओं के निशाना बनाए जाने को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।

द बालोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, लापता महिला की पहचान फातिमा, पत्नी नोरोज़ इस्लाम और मूल रूप से पंजगुर की निवासी के रूप में हुई है। बताया गया है कि फातिमा को हब के अकरम कॉलोनी स्थित उनके घर से उठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। परिवार का कहना है कि अब तक न तो हिरासत का कोई कारण बताया गया है और न ही उनकी वर्तमान स्थिति या ठिकाने के बारे में कोई जानकारी दी गई है।

फातिमा के परिजनों के लिए यह घटना और भी अधिक पीड़ादायक है क्योंकि उनके पति नोरोज़ इस्लाम पहले ही तीन बार कथित रूप से जबरन गायब किए जा चुके हैं। परिवार का कहना है कि वे वर्षों से मानसिक तनाव, भय और संस्थागत दबाव का सामना कर रहे हैं। इस ताजा घटना ने उनके घावों को और गहरा कर दिया है।

यह मामला हब चौकी क्षेत्र में सामने आए एक चिंताजनक पैटर्न की ओर इशारा करता है। इससे पहले 22 नवंबर और दिसंबर 2025 में भी दो अन्य बलोच महिलाओं — नसरीना बलोच (दिलावर की पुत्री, आवारान निवासी) और हजरा — के कथित अपहरण की खबरें सामने आई थीं। इन दोनों मामलों में भी अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है और पीड़ित परिवार अनिश्चितता में जीने को मजबूर हैं।

बलोच यकजहती कमेटी (BYC) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान बलोचिस्तान के विभिन्न जिलों में कम से कम 12 बलोच महिलाओं और लड़कियों के जबरन गायब होने के मामले दर्ज किए गए। समिति का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक सुनियोजित और व्यवस्थित रणनीति का हिस्सा हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले से लापता पुरुषों से जुड़ी महिलाओं को निशाना बनाना एक खतरनाक और चिंताजनक बदलाव को दर्शाता है। उनके अनुसार, जबरन गुमशुदगी को सामूहिक दंड और डराने-धमकाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का खुला उल्लंघन है।